Book Title: Hastlikhit Granthsuchi Part 3
Author(s): Jambuvijay
Publisher: Stambhan Parshwanath Jain Trith Anand

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Page 116
________________ विद्वान उपरथी कृति माहिती नैषधचरितमहाकाव्य-(सं.)साहित्यविद्याधरीटीका सं. (जेताजि३४३, जेताजि३४४, जेताजि३४५, पाकाहेम१०४००) विद्यानन्द-पं. (प्र. नाम-अज्ञात-विजयानन्द) कातन्त्रव्याकरण-(सं.)विद्यानन्दीवृत्ति। सं. (जेताजि२९०, जेताजि२९०, जेताजि२९०, जेताजि२९१, पाताखेत१-३, पाकाहेम६६५८) विद्यानन्दसूरि-आचार्य-दिगम्बर आप्तमीमांसा-(सं.)आप्तमीमांसालङ्कार टीका\ सं. (पाकाहेम४२८५) विनयचन्द्र-मुनि आनन्द श्रावकसन्धि। अप.\ गा.७५ (पाकाहेम९०३२) कथानक कोश\ प्रा.ग्रं.५१४०\ वन्दित्तु भुवणन (पातासंघवी१५४-२) कथानक कोश-(सं.)टीका सं. आसां व्याख्या व (पातासंघवी१५४-२) कविशिक्षा। सं. नत्वा श्रीभारती (पातासंघवी१७६-२) कालिकाचार्यकथा प्रा.गा.७८\ देविन्दविन्द नम (पाताखेत४०-२, पाताहेसं८१) विनयचन्द्रसूरि-आचार्य आदिनाथचरित्रमहाकाव्य। सं. श्लोक४२७८ (पाकाहेम८०१९) कल्पसूत्र-(सं.)टिप्पण। सं. ग्रं.४१८१ सौवर्णः सूत्रभृ (पातासंघवीजीर्ण९४, पातासंघवी१६९-२) पार्श्वनाथचरित्रमहाकाव्य। सं.श्लोक३९८५ (पाकाहेम१९६८) मल्लिनाथचरित्र महाकाव्य सं. ग्रं.४७५० (पाताहेसं५३, भांका३०६) मल्लिनाथचरित्र महाकाव्य-(सं.)विद्याविलास कथा। सं.\ अस्ति स्त्रीस्प (पुप्रे४५१) विनयदेवसूरि-आचार्य प्रथमआश्रवद्वार कुलक\ मागु. गा.९२ (पाकाहेम१६११६) बाणुजिननामस्तवन\ मागु. गा.३१ (पाकाहेम१६११६) विनयप्रभ-उपाध्याय गौतमस्वामिरास\ मागु. गा.८१ (पाकाहेम८९६६, पाकाहेम१०२३६) नरवर्मनृपकथा सं. (पाकाभाभा३६) विनयवर्धन-मुनि विनयवर्धनलिखितपत्र सं. (पाकाहेम८०१२) विनयविजय-उपाध्याय-तपागच्छ चत्तारिअठ्ठदसदोयसूत्र-(प्रा.)विवरण प्रा. गा.२७ (पाकाहेम१२१८१) विजयप्रभसूरिविज्ञप्तिलेख सं. (पाकाहेम८००९) शत्रुञ्जयमण्डन ऋषभदेवविनती\ मागु. गा.५८ (पाकाहेम१०३०५) विबुधचन्द्र मलधारी-मुनि सूक्तसमुच्चय। सं.\ गा.४२१\ छायाविश्रान्तसं (पातासंघवीजीर्ण५२) विमलगणि-गणि दर्शनशुद्धिप्रकरण-(सं.)टीका सं. श्लोक१२००० चञ्चच्चन्द्रमरी (खंता१७२, पाकाहेम७०२३, पाकाहेम७०३४) विमलसूरि-आचार्य (प्र. नाम-आचार्य-ब्रह्मचन्द्र) चित्ताधारपञ्चाशिका\ सं. का.५२ (पाकाहेम१०७०३) त्रिषष्टिशलाकापुरुषचरित्र गद्य सं.\ देवः स वः स्वपद (जेताजि२४६, पाताखेत३९) देशीनाममाला उद्धार सं. श्लोक१२०० (पाकाहेम२३००, पाकाहेम८७२५) धर्मलक्षणप्रकरण सं. श्लोक२२\ धर्मार्थं क्लिश (जेताजि१५४, जेताजि१५८, पाताखेत५, पाताखेत१२, पाताखेत४४-१, पातासंघवी१०८, पातासंघवी५९-३, पातासंघवी१०४-२, पातासंघवी१४५-१, पातासंघवी१६७-१, पातासंघवी१७९-१, पातासंघवी१९६-२, पातासंघवी१९८-२, पातासंघवी२०६-२, पाताहेसं१६१, पाताहेसं१६८, पाताहेसं१८९, खंता८८, खंता९५, खंता९७, खंता१०१, खंता१०७, खंता१०९, खंता११४, खंता११८, खंता१३२, भांता७२, तालाद३२६, अताका४९७, जेकाजि१३२६, पाकाहेम१०२२, पाकाहेम१०२३) नेमिजिन बिरुदावली (स्तोत्र) सं. का.४५\ जय श्रीनेमिजिनव (पातासंघवी२०६-२) पउमचरियं गाथाबद्ध प्रा. ग्रं.१०३०० (जेताजि२६४, पातासंघवी७, पाकाहेम६६९८, पाकाहेम१०१८५)

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