Book Title: Gyansarashtakam
Author(s): Yashovijay
Publisher: Vadilal Mohakambhai Vakil

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Page 15
________________ व 29 26 स्फाटिक मानसरोवरे महा प्रावाजिष्टाम् बन्धून प्राप्तदोषादणां अज्ञापयति द्वादशे गृहाद्वहि रागिःभिः यात् चिन्तयस्वेव पतज्जलि 60000mnsex रोलइ 35 भवेद م م م م م سه سد و سه ه ه ه ه س و م مو स्फटिकं / 185 मानससरोवरे महD प्रात्राजिष्टाम् | 62 9 यात चिन्तयत्स्वेव पतञ्जलि न भवेत बर्जितं स्वरूप निःस्पृहस्य संगृहन्ति 85 10 सर्पस्य निर्जीवाविव 95 13 95 16 इतिवदह समतेवैका धर्मस्य रaeedeeyat बन्धून प्राप्तदोषाणां आज्ञापयति द्वादशे गृहादहि रागिभिः वोलइ प्रहणं सहक्यज्ञानं नोत्पाद पालकाभिधो तछुत्वा तदाकण्य संघादिषु जितं स्वरूप GXDICABIEJIDADES Acca निःपूहस्य प्रहण सहेक्यज्ञान नत्पाद पालकाभिद्यो तच्छ्रुत्वा तदाकण्य संद्यादिषु 36 14 377 39 11 संगृहणन्ति सर्वस्य निर्जीवावि व मत्स्य इतिबदहं समतेवेका धर्मस्या मत्स्या nam यामिकान्त्रिप . समृद्धयः यामिकान्वित समृद्धयः मुने धैर्य मुने

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