Book Title: Digambar Jain 1924 Varsh 17 Ank 06
Author(s): Mulchand Kisandas Kapadia
Publisher: Mulchand Kisandas Kapadia

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Page 9
________________ - अंक दिगम्बर जैन । पंजाब प्रां० सभा-पानीपतमें चैत्र सुदी नीमच में मालवा सभा-नीमचकी ६-७-८ को पंजाब दि. जैन प्रांतिक सभाका छावनीमें वेदी प्रतिष्ठाके साथ २ दि. जैन प्रथम अधिवेशन श्रीमान् आ० ला• प्यारेला- मालवा प्रा० सभाका २० वा अधिवेशन शेठ कमी जैन वकील देहलीके सभापतित्वमें सफ- देवीचंदजी मंदसोरके सभापतित्वमें चैत्र सुदी बता पूर्वक होगया। स्वागत सभापति रा० ब० ११-१२को होगया जिसमें सर सेठ हुकमचंदनी, का. वक्ष्मीचन्दजी व सभापति बाबू प्यारेलाल- ब. गेबीलालजी आदि खास पधारे थे । इसमें भीका व्याख्यान समयानुकूल बहुत ही योग्य कुल ८ प्रस्ताव इस प्रकार पास हुए हैं-(१) हुआ था । कुल १७ प्रस्ताव हुए हैं जिनमेंसे ला• जम्बूपसादजी, पन्नालालजी न्यायदिवाकर, महत्वके ये हैं-(१) सभ के प्रचारार्थ पंनाब ब्र० ज्ञानानंदनी भादिके मृत्युके लिये शोक। (२) प्रान्तमें जिला सभा व जिलाओंमें तहसील सभाएं बाल सगाई, बाल विवाह (१९ वर्षसे कम वर स्थापित की जावे (२) दो उपदेशक रखे जावे व ११ वर्षसे कम उम्र कन्याकी होना) वृद्ध (३ वेश्यानृत्य, बागबिहारी, आतिशबाजी, बूर, विवाह, कन्याविक्रय, व्यर्थव्यय आदि बंद करने बखेर मादि बन्द हो (४) नरनारी समानों के लिये पंचायते कडा नियम बनावें । (३) शारीरिक बरकी स्थिरता व भार्थिक लाभके प्रत्येक दि. जैन मंदिर व पंचायतीके प्रबंधकर्ता लिये व्यायामशाला खोली जावे, प्रत्येक घरमें अपने २ मिम्मेका हिसाब प्रतिवर्ष प्रकाशित मन्न पी: नकी चक्की, कातनेके लिये चरखे व करें (४) दि. जैन धर्म स्वीकार करनेवाले व धुन नेके लिये करधे रखे जावें तथा शुद्ध सादा अपने राज्यमें हिंसा बंद करनेवाले ठाकुर क्रूरभोजन व शुद्ध स्वदेशी वस्त्रोंका उपयोग करके सिंहजीको धन्यवाद (५) सर सेठ हुकमचंदनीको सादा जीवन व्यतीत करे (१) संख्या ह्रासके कारण १ लाख रु. के विशेष दानके लिये धन्यवाद, जाननेके लिये कमेटी की नियुक्ति (६) मंदि (६) सं० २६५० के लिये २७५००)का बजट रोंमें शुद्ध स्वदेशी वस्त्रसे प्रक्षाल की जाय तथा (१० खातोंके लिये) पास किया जाय (७ बजट श स्त्रके वेष्टन शुद्ध स्वदेशी वस्त्रके ही बनाये पूर्ति के लिये फंड किया जाय, (८) ला. जाय (७) सरकारी खाते व स्कूल कोलेजोंमें हजारीलालजी नीमच छावनी (मुनीम सर अनंत चतुर्दशीकी छुट्टी दीनाय (८) युनीवर्सि- सेठ हुकमचंदनी)को धर्म व जाति सेवाके लिये टियोंमें जैन साहित्य व व्याकरणके अन्य प्रवेश " जैनजातिभूषण "का पद दिया जाय । किये मांय । (९) विवाह के समय कन्याकी उम्र समामें करीब ८००) का ही फंड हुआ था। १३ व वरकी उम्र ११ वर्षसे कम न हो शास्त्र दान-जीवदया सभा भागराको (१०) सर्व कौंसिलों व म्यूनिसिपालिटियोंमें ला• मुसद्दीलाळ अमृतप्तरने महिंसाविषयक एक २ जैन सभासद चुनावसे नियत किया पांच हजार ट्रेक्ट खरीद करके दिये हैं तथा जाय भादि । १०००) ट्रेक्ट वितरण विभागको दिये हैं।

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