Book Title: Dhammakahanuogo
Author(s): Kanhaiyalal Maharaj, Dalsukh Malvania
Publisher: Agam Anuyog Prakashan
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वेषदत्साकहाणयं
४९१
तस्स णं महासेणस्म रण्णो धारिणीपामोक्खं देवीसहस्सं ओरोहे यावि होत्था । तस्स णं महासेणस्स रण्णो पुत्ते धारिणीए देवीए अत्तए सोहसेणे नामं कुमारे होत्था-अहीण-पडिपुण्ण-पंचिदियसरीरे जुवराया। तए णं तस्स सोहसेणस्स कुमारस्स अम्मापियरो अण्णया कयाइ पंच पासायवडेंसयसयाई करेंति--अब्भुग्गयमूसियाई० । तए णं तस्स सीहसेणस्स कुमारस्स अम्मापियरो अण्णया कयाइ सामापामोक्खाणं पंचण्हं रायवरकन्नगसयाणं एगदिवसे पाणि गिण्हावसु । पंचसओ दाओ। तए णं से सोहसेणे कुमारे सामापामो?हि पंचहि देवीसएहि सद्धि उप्पि पासायवरगए-जाव-विहरइ । तए णं से महासेणे राया अण्णया कयाइ कालधम्मुणा संजुत्ते । नोहरणं। राया जाए।
सीहसेणरायस्स सामाए मुच्छा ३२३ तए णं से सोहसेणे राया सामाए देवीए मुच्छिए गिद्ध गढिए अज्झोववण्णे अवसेसाओ देवीओ नो आढाइ नो परिजाणइ, अणाढायमाणे
अपरिजाणमाणे विहरइ । तए णं तासि एगणगाणं पंचण्हं देवीसयाणं एगणाइं पंचमाइसयाइं इमीसे कहाए लद्धट्ठाइसवणयाए--"एवं खलु सीहेसेणे राया सामाए देवीए मुच्छिए गिद्धे गढिए अज्झोववण्णे अम्हं धूयाओ नो आढाइ नो परिजाणइ, अणाढायमाणे अपरिजाणमाणे वहरइ । तं सेयं खलु अम्हं सामं देवि अग्गिपओगेण वा विसप्पओगेण वा सत्थप्पओगेण वा जीवियाओ ववरोवित्तए"-एवं संपेहेंति, संपेहेत्ता सामाए देवीए अंतराणि य छिद्दाणि य विवराणि य पडिजागरमाणीओ-पडिजागरमाणीओ विहरति ।
३२४
सामाए कोवघर-पवेसो तए णं सा सामा देवी इमीसे कहाए लट्ठा सवणयाए--"एवं खलु ममं [एगूणगाणं ?] पंचण्हं सवत्तीसयाणं [एगूणाई?] पंचमाइसयाई इमोसे कहाए लट्ठाइं सवणयाए अण्णमण्णं एवं वयासी--एवं खलु सोहसेणे राया सामाए देवीए मुच्छिए-जावपडिजागरमाणीओ विहरंति" तं न नज्जइ णं ममं केणइ कु-मारेणं मारिस्संती ति कट्ट भीया तत्था तसिया उब्विग्गा संजायभया जेणेव कोवघरे तेणेव उवागच्छइ, उवागच्छित्ता ओहयमणसंकप्पा करतलपल्हत्थमुही अट्टज्झाणोवगया भूमिगयदिट्ठीया झियाइ । तए णं से सोहसेणे राया इमीसे कहाए लद्धठे समाणे जेणेव कोवघरए, जेणेव सामा देवी, तेणेव उवागच्छइ, उवागच्छित्ता सामं देवि
ओहयमणसंकप्पं करतलपल्हत्थमुहि अट्टज्झाणोवगयं भूमिगयदिट्ठी झियायमाणि पासइ, पासित्ता एवं वयासी--कि णं तुम देवाणुप्पिए ! ओहयमणसंकप्पा करतलपल्हत्थमुही अट्टज्झाणोवगया भूमिगयदिट्ठीया झियासि ? तए णं सा सामा देवी सोहसेणेणं रण्णा एवं बुत्ता समाणा उप्फेणउप्फेणियं सोहसेणं रायं एवं वयासी--एवं खलु सामी ! ममं एगणगाणं पंच सवत्तीसयाणं एगणाई पंच माइंसयाई इमीसे कहाए लद्धट्ठाई सवणयाए अण्णमण्णं सद्दावेत्ता एवं वयासी--"एवं खलु सोहसेणे राया सामाए देवीए मुच्छिए गिद्धे गढिए अज्झोववण्णे अम्हं धूयाओ नो आढाइ नो परिजाणइ-जाव-अंतराणि य छिद्दाणि य विवराणि य पडिजागरमाणीओ-पडिजागरमाणीओ विहरति । तं न नज्जइ णं सामी ! ममं केणइ कु-मारेणं मारिस्संति कट्ट भीया-जाव-झियामि ।"
सोहसेणेण सामासवत्तीसयमाईणं अग्गिणा वहो ३२५ तए णं से सोहसेणे राया सामं देवि एवं वयासी-"मा णं तुम देवाणुप्पिया ! ओहयमणसंकप्पा-जाव-झियाहि । अहं गं तह
घत्तिहामि जहा णं तव नस्थि कत्तो वि सरीरस्स आबाहे वा पबाहे वा भविस्सई" त्ति कटु ताहि इटाहि कंताहि पियाहि मणुण्णाहिं मणामाहि वहि समासासेइ, समासासेत्ता तओ पडिनिक्खमइ, पडिनिक्खमित्ता कोडुंबियपुरिसे सद्दावेइ, सद्दावेत्ता एवं वयासी-- गच्छह णं तुम्भे देवाणुप्पिया! सुपइट्ठस्स नयरस्स बहिया एगं महं कूडागारसालं--अणेगक्खंभसयसंनिविट्ठ पासादीयं दरिसणिज्जं अभिरूवं पडिरूवं करेह ममं एयमाणत्तियं पच्चप्पिणह।। तए णं से कोडुबियपुरिसा करयलपरिग्गहियं सिरसावत्तं मत्थए अंजलि कट्ट एवं सामि !' त्ति आणाए विणएणं वयणं पडिसुणेति, पडिसुणेत्ता सुपइट्ठनयरस्स बहिया पच्चत्थिमे दिसीभाए एणं महं कूडागारसालं--अणेगक्खंभसयसंनिविट्ठ पासादीयं दरिसणिज्जं अभिरूवं पडिरूवं करेंति, जेणेव सीहसेणे राया तेणेव उवागच्छंति, उवागच्छित्ता तमाणत्तियं पच्चप्पिणंति । तए णं से सीहसेणे राया अण्णया कयाइ एगूणगाणं पंचण्हं देवीसयाणं एगूणाई पंच माइसयाई आमतेइ ।
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