Book Title: Dandak Prakaranam
Author(s): Gajasarmuni, Vijayodaysuri
Publisher: Granth Prakashak Sabha
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॥श्री महावीरप्रभुस्तुतिगर्भित परमकारुणिक पं० पद्मविजगणिप्रणितं ॥
विविधरागबद्धं, एकोनहिंशतिद्वारेषु चतुर्विंशति दण्डक
समवताररूपं स्तवनम,
(दुहा) मणमी सरसति भगवति, तीम जिनवर चोवीश, गौतम प्रमुख सूरि तथा, गुरु उत्तम मुजगीश ॥१॥ चोवीश दंडकने विषे, द्वार अछे गुणतिश; विवरी कहिशु तेहने, जिम भाख्या जगदीश ॥२॥ नाम १ लेश्या २ त्रीजुं तनु, ३ अवगाहना ४ संघेण, ५ संज्ञा, ६ आकृति सातमु, ७ संपराय ८ मुणो सेण ॥३॥ ९इन्द्रि१०समुद्घात ११ दृष्टि१२दर्शन, १६नाण१४-१५जोगोपयोग: १६उपपात ने१७वचन१८स्थिति१९पज्जत्ति२०आहारनो भोग ॥४॥ २१गति आगति २२वेद २३भवननो, चोविशमो २४माणदार; २५संपदा२६धर्म२७जीवायोनि,२८कुळ २९अल्पबहुत्व विचार ॥५॥

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