Book Title: Bhaktamara Stotra Yantras
Author(s): 
Publisher: ZZZ Unknown

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Page 3
________________ भक्तामर यंत्र -३ Bhaktamara Yantra. 3 - बुद्ध्या विनाऽपि विबुधार्चितपादपीठ ! ने नमो भगवते वाज ही अहम 6कली नमः स्वाहा। मो परमोहि कालाकली जिला कला मन्यःक इच्छति जनः सहसा ग्रहीतुम्? ॥३॥ स्वयंरूपाय नमः कला का 'परमतत्त्वार्थ भावकार्यसिद्धये स्तोतुं समुद्यतमतिर्विगतत्रपोऽहम् । KARE Kap तयः सर्वसि Ple -nejhah Phye blay AIR TO बुद्धया विनाऽपि विबुधार्चित पादपीठ स्तोतुं समुद्यत मतिर्विगतत्रपोऽहम् । बालं विहाय जलसंस्थितमिन्दु बिम्ब - मन्यः क इच्छति जनः सहसा ग्रहीतुम् ॥३ ऋद्धि-ॐ हीं अहं णमो परमोहिजिणाणं । मंत्र-ॐ ही श्री कली सिद्धेभ्यो बुद्धेभ्यः सर्वांसद्धिदायकेभ्यो नमः स्वाहा । प्रभाव दृष्टि रोग अपसरण और जय प्राप्ति होती है। Restoration of vision and attaining success.

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