Book Title: Arhat Vachan 2011 01 04 Author(s): Anupam Jain Publisher: Kundkund Gyanpith Indore View full book textPage 6
________________ 24. 19. जैसलमेर (राज.) के हस्तलिखित ग्रंथों की सूची, सेवा मंदिर, रावटी, जोधपुर, 2000 20. अनेकांत भवन ग्रंथ रत्नावली, भाग 1-3, ब्र. संदीप जैन 'सरल', बीना, 2000, 2001 21. आचार्य कुन्दकुन्द हस्तलिखित शास्त्र भण्डार, खजुराहों (म.प्र.) में संग्रहीत पाण्डुलिपियों की सूची, अनुपम जैन आदि, कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ, इंदौर एवं श्री सत्श्रुत प्रभावना ट्रस्ट, भावनगर, 2000 22. भट्टारक यशकीर्ति दिगम्बर जैन सरस्वती भवन, ऋषभदेव में संग्रहीत पाण्डुलिपियों की सूची, अनुपम जैन आदि, कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ, इंदौर एवं श्री सत्श्रुत प्रभावना ट्रस्ट, भावनगर, 2001 23. राष्ट्रीय प्राकृत अध्ययन एवं संशोधन संस्थान-कन्नड़ और प्राकृत हस्तप्रतियों की वर्णनात्मक सूची, भाग-4, बी.एस सण्णय्या, अनु. पी.डी. श्रीधर, श्रुतकेवली एजुकेशन ट्रस्ट, श्रीधवलतीर्थ, श्रवणबेलगोला, 2003 कैलास श्रुतसागरसूरि ग्रंथ सूची, आचार्य श्री कैलाससागर सूरि ज्ञानमंदिर में संग्रहीत हस्तलिखित ग्रंथों की विस्तृत सूचियां, श्री महावीर जैन आराधना केन्द्र, कोबा तीर्थ, गांधीनगर, 2003, 2004, 2005, 2006 25. Catalogue of Jaina Manuscripts in India house Library, Institute of Jainology, London, 2006 26. Descriptive Catalogue of Manuscripts in the Bhattarkiya Granth Bhandar, Nagour Vol. 1-5, P.C. Jain, Centre for Jain Studies, University of Rajasthan, Jaipur, 1978, 1981, 2009, 2011 27. इन्दौर ग्रंथावली भाग- 1 (कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ, इंदौर में संग्रहीत पांडुलिपियों की सूची), अनुपम जैन एवं ब्र. अनिल जैन, इन्दौर, 2011 (मुद्रणाधीन) इसके अलावा भी कुछ सूचीपत्र हो सकते हैं इनकी सूचनाएं अपेक्षित हैं। कुछ सूचियों को मात्र भण्डार के उपयोग हेतु ही तैयार किया गया किन्तु उनका विधिवत प्रकाशन नहीं हुआ। राष्ट्रीय पाण्डुलिपि मिशन द्वारा मध्यप्रदेश के जैन शास्त्र भण्डारों का सूचीकरण का कार्य कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ, इन्दौर के माध्यम से कराया गया है। इसका विस्तृत विवरण हम अगले अंक में प्रकाशित करेंगे। इस अंक में जिन लेखकों के लेखों को स्थान दिया गया है उनके प्रति अनेकशः आभार। अर्हत् वचन के इस संयुक्तांक 23 (1-2) के सृजन में संस्थाध्यक्ष डॉ. अजित कासलीवाल एवं आश्रम ट्रस्ट के सभी ट्रस्टियों का संरक्षण एवं सहयोग रहा। मेरे महाविद्यालयीन साथियों विशेषतः महाविद्यालय के गणित विभाग के साथी प्राध्यापकों एवं प्राचार्य डॉ. एस.एल.गर्ग ने भी अप्रत्यक्ष रूप से बहुत सहयोग दिया है उन्हें भी बहुत-बहुत धन्यवाद। इस अंक में प्रकाशित सामग्री पर पाठकों की प्रतिक्रियाओं का स्वागत है। श्रुतपंचमी, 06.06.2011 डॉ. अनुपम जैन अर्हत् वचन, 23 (1-2),2011Page Navigation
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