Book Title: Anusandhan 2011 06 SrNo 55
Author(s): Shilchandrasuri
Publisher: Kalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad

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Page 118
________________ ११२ अनुसन्धान-५५ सन्मतितर्कनी प्रस्तुत विषयने सम्बन्धित मूळगाथाओ दव्वट्ठियवत्तव्वं, सव्वं सव्वेण णिच्चमवियप्पं । आरद्धो य विभागो, पज्जववत्तव्वमग्गो य ॥१.२९॥ सो उण समासओ च्चिय, वंजणणिअओ य अत्थणिअओ य । अत्थगओ य अभिण्णो, भइयव्वो वंजणविअप्पो ॥१.३०॥ एगदवियम्मि जे अत्थ-पज्जया वयणपज्जया वा वि । तीयाणागयभूया, तावइयं तं हवइ दव्वं ॥१.३१।। पुरिसम्मि पुरिससद्दो, जम्माई मरणकालपज्जंतो । तस्स उ बालाईया, पज्जवजोया बहुवियप्पा ॥१.३२।। अत्थि त्ति णिव्वियप्पं, पुरिसं जो भणइ पुरिसकालम्मि । सो बालाइवियप्पं, न लहइ तुल्लं व पावेज्जा ॥१.३३।। वंजणपज्जायस्स उ पुरिसो, पुरिसो त्ति णिच्चमवियप्पो । बालाइवियप्पं पुण, पासइ से अत्थपज्जाओ ॥१.३४।। सवियप्प-णिव्वियप्पं, इय पुरिसं जो भणेज्ज अवियप्पं । सवियप्पमेव वा णि-च्छएण ण स निच्छिओ समए ॥१.३५।। अत्यंतरभूएहि य, णियएहि य दोहि समयमाईहिं । वयणविसेसाईयं, दव्वमवत्तव्वयं पडइ ॥१.३६।। अह देसो सब्भावे, देसोऽसब्भावपज्जवे णियओ । नं दवियमत्थि णत्थि य, आएसविसेसियं जम्हा ॥१.३७।। सब्भावे आइट्ठो, देसो देसो य उभयहा जस्स । तं अत्थि अवत्तव्वं, च होइ दविअं वियप्पवसा ॥१.३८।। आइट्ठोऽसब्भावे, देसो देसो य उभयहा जस्स । तं णत्थि अवत्तव्वं, च होइ दविअं वियप्पवसा ॥१.३९॥ सब्भावासब्भावे, देसो देसो य उभयहा जस्स । तं अत्थि णत्थि अवत्त-व्वयं च दवियं वियप्पवसा ॥१.४०॥ एवं सत्तवियप्पो, वयणपहो होइ अत्थपज्जाए । वंजणपज्जाए उण, सवियप्पो णिव्वियप्पो य ॥१.४१।।

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