Book Title: Anusandhan 1998 00 SrNo 11
Author(s): Shilchandrasuri
Publisher: Kalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad
View full book text
________________
78
अने आ ज वात १२मा षोडशकनी सोळमी आर्यामां वधु स्पष्ट रीते मळे छे:
'व्याध्यभिभूतो यद्वन्निविण्णस्तेन तक्रियां यत्नात् ।
सम्यक्करोति तद्वद् दीक्षित इह साधुसच्चेष्टाम् ॥ २३ २. 'पञ्चसूत्र' ना चोथा सूत्रमा आवतो एक वाक्यसमूह आवो छ :
'से समलेट्टकंचणे समसत्तुमिते नियत्तग्गहदुक्खे पसमसुहसमेए सम्मं सिक्खमाइयइ, गुरुकुलवासी, गुस्मडिबद्धे, विणीए, भूयत्थदरिसी, न इओ हियतरंति मन्नइ, सुस्सूसाइगुणजुत्ते तत्ताभिनिवेसा विहिपरे परममंते त्ति अहिज्जइ सुत्तं'।।२४
आ वाक्योनो ज भावार्थ धरावती अने अंशतः शाब्दिक साम्यवाळी, बारमी विंशिकानी गाथाओ आ प्रमाणे छे :
'इत्थ वि होदइगसुहं तत्तो एवोपसमसुहं ॥४॥ सिक्खादुगंमि पीई जह जायइ हंदि समणसीहस्स । तह चक्कवट्टिणो वि हु नियमेण न जाउ नियकिच्चे ॥५॥ गिण्हइ विहिणा सुत्तं भावेण परममंतस्त्र त्ति ॥२५
३. चोथा सूत्रमा ज 'आयओ गुरुबहुमाणो अवंझकारणत्तेण । अओ परमगुरुसंजोगो । तओ सिद्धी असंसयं ।२६ एवो पाठ छे, तेनी साथे संपूर्ण साम्य धरावती बीजा षोडशकनी आ कारिका जुओ :
गुरुपारतन्त्र्यमेव च तद्बहुमानात् सदाशयानुगतम् ।
परमगुरुप्राप्तेरिह बीजं तस्माच्च मोक्ष इति ॥१०॥२७ खूबी तो अहीं ए छे के 'पञ्चसूत्र' ना पाठमां आवता 'अवंझकारणत्तेण' पदनो अर्थ, तेनी टीकामां 'मोक्षं प्रत्यप्रतिबद्धसामर्थ्यहेतुत्वेन' एवो को छे, अने षोडशक ना पद्यमां रहेला 'सदाशयानुगतं' पदनो अर्थ पण, तेना टीकाकारोए ‘सदाशयः संसारक्षयहेतुर्गुरुश्यं ममेत्येवंभूतः कुशलपरिणामस्तेनानुगतं गुस्यारतन्त्र्यं'२९ एवो ज को छे. आथी आ बन्ने अलग ग्रंथोना पाठोनुं शाब्दिक ज नहि, आर्थिक साम्य पण छतुं थाय छे.
Jain Education International
For Private & Personal Use Only
www.jainelibrary.org

Page Navigation
1 ... 81 82 83 84 85 86 87 88 89 90 91 92 93 94 95 96 97 98 99 100 101 102 103 104 105 106 107 108 109 110 111 112 113 114 115 116 117 118 119 120 121 122