Book Title: Agam 18 Jambudwippragnapti Sutra Hindi Anuwad
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Dipratnasagar, Deepratnasagar
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आगम सूत्र १८, उपांगसूत्र- ७, 'जम्बूद्वीपप्रज्ञप्ति'
वक्षस्कार-६- जम्बूद्वीपगत पदार्थ
वक्षस्कार / सूत्र
सूत्र - २४५
भगवन् ! क्या जम्बूद्वीप के चरम प्रदेश लवणसमुद्र का स्पर्श करते हैं ? हाँ, गौतम ! करते हैं । जम्बूद्वीप के जो प्रदेश लवणसमुद्र का स्पर्श करते हैं, क्या वे जम्बूद्वीप के ही प्रदेश कहलाते हैं या लवणसमुद्र के ? गौतम ! वे जम्बूद्वीप के ही प्रदेश कहलाते हैं । इसी प्रकार लवणसमुद्र के प्रदेशों की बात है ।
भगवन् ! क्या जम्बूद्वीप के जीव मर कर लवणसमुद्र में उत्पन्न होते हैं ? गौतम ! कतिपय उत्पन्न होते हैं, कतिपय उत्पन्न नहीं होते। इसी प्रकार लवणसमुद्र के जीवों के विषय में जानना ।
सूत्र - २४६
खण्ड, योजन, वर्ष, पर्वत, कूट, तीर्थ, श्रेणियाँ, विजय, द्रह तथा नदियाँ - इनका प्रस्तुत सूत्र में वर्णन है । सूत्र - २४७, २४८
भगवन् ! जम्बूद्वीप के भरतक्षेत्र के प्रमाण जितने - भरत क्षेत्र के बराबर खण्ड किये जाए तो वे कितने होते हैं ? गौतम ! खण्डगणित के अनुसार वे १९० होते हैं । भगवन् ! योजनगणित के अनुसार जम्बूद्वीप का कितना प्रमाण है ? गौतम ! जम्बूद्वीप का क्षेत्रफल - प्रमाण ७,९०,५६,९४,१५० योजन है ।
सूत्र - २४९
भगवन् ! जम्बूद्वीप में कितने वर्ष - क्षेत्र हैं ? गौतम ! सात, भरत, ऐरावत, हैमवत, हैरण्यवत, हरिवर्ष, रम्यकवर्ष तथा महाविदेह । जम्बूद्वीप के अन्तर्गत छह वर्षधर पर्वत, एक मन्दर पर्वत, एक चित्रकूट पर्वत, एक विचित्रकूट पर्वत, दो यमक पर्वत, दो सौ काञ्चन पर्वत, बीस वक्षस्कार पर्वत, चौतीस दीर्घ वैताढ्य पर्वत तथा चार वृत्त वैताढ्य पर्वत हैं । यों जम्बूद्वीप में पर्वतों की कुल संख्या २६९ है । जम्बूद्वीप में ५६ वर्षधरकूट, ९६ वक्षस्कारकूट, ३०६ वैताढ्यकूट तथा नौ मन्दरकूट हैं । इस प्रकार कुल ४६७ कूट होते हैं ।
भगवन् ! जम्बूद्वीप के अन्तर्गत भरतक्षेत्र में कितने तीर्थ बतलाये गये हैं ? गौतम ! तीन, मागधतीर्थ, वरदामतीर्थ तथा प्रभासतीर्थ । इसी तरह ऐरवतक्षेत्र और महाविदेहक्षेत्र में भी जानना । यों जम्बूद्वीप के चौतीस विजयों में कुल १०२ तीर्थ हैं। जम्बूद्वीप में अड़सठ विद्याधर- श्रेणियाँ तथा अड़सठ आभियोगिक-श्रेणियाँ हैं । इस प्रकार कुल १३६ श्रेणियाँ हैं । जम्बूद्वीप के अन्तर्गत ३४-३४ चक्रवर्तिविजय, राजधानियाँ, तिमिस्र गुफाएं, खण्डप्रपात गुफाएं, कृतमालक देव, नृत्तमालक देव तथा ऋषभकूट बतलाये गये हैं ।
भगवन् ! जम्बूद्वीप के अन्तर्गत् महाद्रह कितने बतलाये गये हैं ? गौतम ! सोलह । जम्बूद्वीप के अन्तर्गत १४ महानदियाँ वर्षधर पर्वतों से निकलती हैं तथा ७६ महानदियाँ कुण्डों से निकलती हैं। कुल मिलाकर ९० महानदियाँ हैं । भरत तथा ऐरवत में चार महानदियाँ हैं - गंगा, सिन्धु, रक्ता तथा रक्तवती । एक एक महानदी में चौदहचौदह हजार नदियाँ मिलती हैं। वे पूर्वी एवं पश्चिमी लवणसमुद्र में मिलती हैं । भरतक्षेत्र में गंगा महानदी पूर्वी लवणसमुद्र में तथा सिन्धु महानदी पश्चिमी लवणसमुद्र में मिलती है । ऐरावत क्षेत्र में रक्ता महानदी पूर्वी लवणसमुद्र में तथा रक्तवती महानदी पश्चिमी लवणसमुद्र में मिलती है । यों जम्बूद्वीप के भरत तथा ऐरावत क्षेत्र में कुल ५६००० नदियाँ हैं ।
जम्बूद्वीप के अन्तर्गत हैमवत एवं हैरण्यवत क्षेत्र में चार महानदियाँ हैं- रोहिता, रोहितांशा, सुवर्णकुला तथा रूप्यकूला । प्रत्येक महानदी में अठ्ठाईस अठ्ठाईस हजार नदियाँ मिलती हैं। वे पूर्वी एवं पश्चिमी लवणसमुद्र में मिलती हैं । हैमवत में रोहिता पूर्वी लवणसमुद्र में तथा रोहितांशा पश्चिमी लवणसमुद्र में मिलती हैं। हैरण्यवत में सुवर्णकूला पूर्वी लवणसमुद्र में तथा रूप्यकूला पश्चिमी लवणसमुद्र में मिलती हैं । इस प्रकार जम्बूद्वीप के हैमवत तथा हैरण्यवत क्षेत्र में कुल ११२००० नदियाँ हैं ।
मुनि दीपरत्नसागर कृत् " (जम्बूद्वीपप्रज्ञप्ति)" आगमसूत्र - हिन्द- अनुवाद"
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