Book Title: Stuti Tarangini Part 03
Author(s): Bhadrankarsuri
Publisher: Labdhi Bhuvan Jain Sahitya Sadan

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Page 417
________________ ३६८ असुह - कम्मविणासण- तप्परा, सुगुरुहीर विजय- सरीसरो नमह वीरजिणागममुजलं, विमल अत्थमणीगणसंकुलं । कुमयमाण - विमद्दणगज्झियं, विजयसेणगणाहिव - वंदियं हरउ विश्वभरं सुयदेवया, मम जवेण नया खिलकोविया । कुसलवद्भण- सीस - सुमाणिया, सुगुरुहीर विजय मुद्दणिग्गया - इय थुओ रिसहाइ - जिणुकरो, कुणउ मंगल - सेणि-ममच्छरो । सलवद्धण - सीससुद्दकरो, सुगुरुहीर विजय- सूरीसरो Jain Education International स्तुति तरंगिणी For Private & Personal Use Only ॥२५॥ ॥२६॥ ॥२७॥ ||२८|| ( शुभवीरवि. ज्ञानभंडार पाटण ) www.jainelibrary.org

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