Book Title: Shrimad Devchandraji Vistrut Jivan Charitra Tatha Devvilas
Author(s): Buddhisagar, Manilal Mohanlal Padrakar, Kaviyan
Publisher: Adhyatma Gyan Prasarak Mandal

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Page 194
________________ १५ वाचक श्री राजसागरु, कोविदमें शिरताज; दिन केतलाएक गया पछी, मन चिंत्यु शुभकाज. ३ दीक्षा देवी शिष्यने, सुभ महुरत जोइ जोस; सुभ चोघडीए देखीने, तो थाये संतोस. संघ सकलने तेडीने, दीक्षानी कही वात; वचन प्रमाण करे तिहां, उलस्यां सहूनां गात्र. शुभ ओछव महोछवे, दीक्षा दीये गुरुराय; संवत छपने जाणीये, लघु दीक्षा दीये गुरुराय. ६ श्री जिनचंदसूरीश्वरे, वडी दीक्षा दीये सार; राजविमल अभिधा दीउ, श्रीजीनो घणो प्यार. ७ राजसागरजीये हितधरी, सरस्वतीकेशे मंत्र; आपुं शिष्य देवचंदने, मनमें कीधो तंत्र. गाम बेलाडु जाणीये, वेणातट सुभरम्य; भूमिगृह में राखीने, साधन करे तारतम्य. थइ प्रसन्न सरस्वती, रसनाग्रे कीयो वास; भगवानो उद्यम करे, श्री गुरुसाहाज्य उलास. १० देशी-बारी म्हारा साहिबा ४ Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat ५ ९ देवचंद्र अणगारने हो लाल, सुभ शास्त्रतणा अभ्यासरे, देखीने ठरे लोयणा. १ www.umaragyanbhandar.com

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