Book Title: Shrimad Devchandraji Vistrut Jivan Charitra Tatha Devvilas
Author(s): Buddhisagar, Manilal Mohanlal Padrakar, Kaviyan
Publisher: Adhyatma Gyan Prasarak Mandal

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Page 215
________________ धन.८ धन० ९ धन. १० युद्ध करवा भंडारी साथे, आव्यो नगारुं देइनेरे. रतनसिंघ भंडारी तक्षिण, आव्यो श्री गुरुपासेरे; कांइ करणो दल बहोतज आयो, में छां थांके विस्वासेरे. फिकर मत करो भंडारीजी, प्रभुजी आछो करस्येरे; जीत वाद थाहरो अब होस्ये, करणी पार उतरस्येरे. चमत्कार श्री जिन आम्नायोनी, गुरुजीये ते दीधारे; फतेह करीने आज्यो वहिला, थांको कारज सीधोरे. रतनसंघजी सैन्य लेइने, युद्ध करवाने साहमोरे; रणकुजी साथे तोपखाने, चाल्यो न करे खामोरे. परस्परे युद्धे रणकुंजी हायों, थइ भंडारीनी जीतरे; धन० ११ धन० १२ Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com

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