Book Title: Shrimad Devchandraji Vistrut Jivan Charitra Tatha Devvilas
Author(s): Buddhisagar, Manilal Mohanlal Padrakar, Kaviyan
Publisher: Adhyatma Gyan Prasarak Mandal

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Page 198
________________ १९ ज्ञानविमल सूरिजी, तिहां गया शेठ उदार. विधिस्युं वांदी पुछीयुं, सहकूट सहस्रनाम; आगमेंथी पृथकता, निकासी सुभधाम. ज्ञानविमलसूरि कहे, सहसकूटनां नाम; अवसरे प्राये जणावस्युं, कहेस्युं नाम ने ठाम. ११ सकलशास्त्रे उपयोगता, तिहां उपयोग न कोइ; आगम कुंची जाणवी, ते तो विरला कोइ. ए देशी : - माहरी सहीरे समाणी. एक दिन श्री पाटण मझार, स्याहानी पोलिं उदाररे. सहसजिननो रसीयो देवचद्रं, वयणे उलसीयो. ते पोलिं चोमुखवाडी पास, सहुनी पूरे आसरे. सतरभेदी पूजा रचाणी, प्रभु गुणनी स्तवना मचाणीरे. ज्ञानविमळ सूरि पूजामें आव्या, भावकने मन भाव्यारे. तिहां वली यात्राये देवचंद्र, आव्या बहुजनने वृन्दरे. Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat १ स० टेक. स० ९ १० स० १ स० १२ स० २ www.umaragyanbhandar.com

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