Book Title: Jain Sahitya me Kshetra Ganit
Author(s): Mukutbiharilal Agarwal
Publisher: Z_Anandrushi_Abhinandan_Granth_012013.pdf

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Page 5
________________ ....Anir- AnuraaNMAARJAAAAPaneRAMKARANaircularuantanARJAIAALARAMAdmdahanudra आचार्य प्रवा आणि आचार्यप्रवर भिक श्राआनन्दमयन्याआड अभिनन्दन ४२६ धर्म और दर्शन E ICzars -TED समचतुरस्त्र चित्र २५ द्विद्वि समचतुरस्र चित्र २६ द्विसमचतुरस्त्र चित्र २७ त्रिसमचतुरस्र विषम चतुरस्र चित्र २८ चित्र २६ महावीराचार्य ने वक्ररेखीय आकृतियां निम्नलिखित आठ प्रकार की वर्णित की हैंसमवृत्त, अर्द्धवृत्त, आयतवृत्त (दीर्घवृत्त), कम्बुकावृत्त (शंखाकार क्षेत्र), निम्नावृत्त (अवतलवृत्तीय क्षेत्र जैसे होमवेदी का अग्निकुंड), उत्तलवृत्तीय क्षेत्र जैसे कछुवे की पीठ), बहिश्चक्रवाल वृत्त और अन्तश्चक्रवाल वृत्त । समवृत्त चिच ३० अर्धवृत्त चित्र ३१ आयतवृत्त चित्र ३२ rce कम्बुकावृत (शख के आकार की आकृति) निम्नावृत्त चित्र ३४ उन्नतावृत्त चित्र ३५ चित्र ३३ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org

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