Book Title: Jain Gruhastha Ke Vrataropan Sambandhi Vidhi Vidhano ka Prasangik Anushilan
Author(s): Saumyagunashreeji
Publisher: Prachya Vidyapith

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Page 8
________________ लोकार्पण जिनकी विरल जिज्ञासाओं ने शोध कार्य की प्रेरणा दी। जिनके अप्रतिम सहयोग ने विषमता में साहस दिया। जिनके जटिल प्रश्नों ने चिंतन के नस द्वार उद्घाटित किए। जिनके निश्छल स्नेहाशीष ने सफलता का विश्वास दिया। उन समस्त आत्मीय जनों को सादर समर्पित

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