Book Title: Gandharwad
Author(s): Jinbhadragani Kshamashraman, Vinaysagar
Publisher: Rajasthan Prakrit Bharti Sansthan Jaipur

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Page 17
________________ गणधारवाद क्या हैं ? भाषान्तर की शैली आवश्यक सूत्र और उसका प्रथम २. श्रावश्यक सूत्र के कर्ता प्रस्तावना पृष्ठ १-१६० अध्ययन २ विशेषावश्यक भाष्य में गणधरवाद का प्रसंग ३ ३. आवश्यक. नियुक्ति के कर्ता भद्रबाहु विषयानुक्रम कौन ? ५-१० आवश्यक के प्रणेता के सम्बन्ध में दो मान्यतायें ६ नियुक्ति का स्वरूप आवश्यक नियुक्ति रचनाक्रम नियुक्ति का शब्दार्थ उपोद्घात भ० ऋषभदेव का परिचय भ० महावीर गणधर - प्रसंग शेष द्वार सामायिक उपसंहार १-५ १ ४. प्राचाय भद्रबाहु की नियुक्तियों का उपोद्घात ११-२६ Jain Education International १०-११ ११ १२ १३ १४ १६ १७ १६ २० २१ २३ २३ ५. प्राचार्य जिनभद्र पूर्व - भूमिका जीवन और व्यक्तित्व सत्ता समय ६. प्राचार्य जिनभद्र के ग्रन्थ ३५-४७ ३५ १. विशेषावश्यक भाष्य २ विशेषावश्यक भाष्य ३. बृहत्संग्रहणी ४. बृहत क्षेत्र समास ५. विशेषणवती ६. जीतकल्प सूत्र ७. जीतकल्प भाष्य ८. ध्यानशतक २७-३५ २७ २९ ३२ स्वोपज्ञ वृत्ति ३६ ३६ ३७ ३९ ४२ ७. भवभावना सूत्र ८. भवभावना विवरण ९. नन्दि - टिप्पण १०. विशेषावश्यक विवरण For Private & Personal Use Only ४३ ७. मलधारी हेमचन्द्राचार्य ४७-५४ ८. मलधारी हेमचन्द्र के ग्रन्थ ५४-६१ १. आवश्यक टिप्पण ५६ २. बन्धशतक वृत्ति - विनयहिता ५६ ३. अनुयोगद्वार वृत्ति ५८ ४. उपदेशमाला सूत्र ५. उपदेशमाला - विवरण ६. जीवसमास - विवरण ४७ ५८ ५६ ५६ ६० ६० ६० ६१ www.jainelibrary.org

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