Book Title: Bhagavati Sutra ke Thokdo ka Dwitiya Bhag Author(s): Ghevarchand Banthiya Publisher: Jain Parmarthik Sanstha Bikaner View full book textPage 9
________________ ३ C दृष्टान्त से तथा थारा नाभि के दृष्टान्त से दक्षिण दिशा के चमरेन्द्रजी सम्पूर्ण जम्बूद्वीप को भर देते हैं । तिरछा असंख्याता द्वीप समुद्र भरने की शक्ति है ( विषय आसरी), किन्तु कभी भरे नहीं, भरते नहीं और भरेंगे नहीं । उत्तर दिशा के बलीन्द्रजी जम्बूद्वीप झारा (कुछ अधिक ) जितना क्षेत्र भर देते हैं। तिरछा असंख्याता द्वीप समुद्र भरने की शक्ति है ( विषय श्रासरी), किन्तु कभी भरे नहीं, भरते नहीं और भरेंगे नहीं । • जिस तरह असुरकुमार के इन्द्र का कहा उसी तरह उनके सामानिक और तायत्तीसग का भी कह देना चाहिये | लोकपाल और अग्रमहिपी की तिरछा संख्याता द्वीप समुद्र भरने की शक्ति है ( विषय आसरी ), किन्तु कभी भी भरे नहीं, भरते नहीं, भरेंगे नहीं । नवनिकाय के देवता, वाणव्यन्तर और ज्योतिषी देवता एक जम्बुद्वीप भर देते हैं । तिरछा संख्याता द्वीप समुद्र भरने की शक्ति है ( विषय आसरी ), किन्तु कभी भरे नहीं, भरते नहीं, भरेंगे नहीं । पहले देवलोक के पांचों ही बोल ( इन्द्र, सामानिक, तायतीसग, लोकपाल, अग्रमहिपी ) दो जम्बूद्वीप जितना क्षेत्र भर मूल रूप से प्रतिबद्ध रहते हैं । ऐसे वैक्रिय रूप करके जम्बूद्वीप को ठसा - ठस भर देते हैं ।Page Navigation
1 ... 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 32 33 34 35 36 37 38 39 40 41 42 43 44 45 46 47 48 49 50 51 52 53 54 55 56 57 58 59 60 61 62 63 64 65 66 67 68 69 70 71 72 73 74 75 76 77 78 79 80 81 82 83 84 85 86 87 88 89 90 91 92 ... 139