Book Title: Bhagavati Sutra ke Thokdo ka Dwitiya Bhag
Author(s): Ghevarchand Banthiya
Publisher: Jain Parmarthik Sanstha Bikaner

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Page 10
________________ . . . देते हैं। दूसरे देव लोक के देव, दो जम्बूद्वीप झाझेरा, तीसरे देवलोक के देव ४ जम्बूद्वीप, चौथे देवलोक के देव ४ जम्बूद्वीप झाझेरा, पांचवें देवलोक के देव ८ जम्बूद्वीप, छठे देवलोक के देव ८ जम्बूद्वीप झाझरा, सातवें देवलोक के देव १६ जम्बूद्वीप, आठवें देवलोक के देव १६ जम्बूद्वीप झाझरा, नवमें दसवें देव लोक के देव ३२ जम्बूद्वीप, ग्यारहवें चारहवें देवलोक के देव ३२ जम्बूद्वीप झाझेरा क्षेत्र भर देते हैं और शक्ति (विषय आसरी ) असंख्याता द्वीप समुद्र भरने की है किन्तु कभी भरे नहीं, भरते नहीं और भरेंगे नहीं। ____ पहले दूसरे देवलोक के इन्द्र, सामानिक और तायत्तीसग इन तीन की तिरछा असंख्याता द्वीप समुद्र मरने की शक्ति है और लोकपाल तथा अग्रसहिषी की तिरछा संख्याता द्वीप समुद्र भरने की शक्ति है । तीसरे देवलोक से बारहवें देवलोक तक सब की ( इन्द्र, सामानिक, तायत्तीसग, लोकपाल, अग्रमहिपी) तिरछा असंख्याता द्वीप समुद्र भरने की शक्ति है ( विषय आसरी ) किन्तु कभी भी भरे नहीं, भरते नहीं और भरेंगे नहीं। गाथाछट्ठम मासो उ अद्धमासो वासाई अट्ठ छम्मासा । तीसय कुरुदत्ताणं तवभत्त परिगणा परियायो । उच्चत्त विमाणाणं पाउब्भव पेच्छणा य संलावे । किच्चि विवादुप्पत्ती, सणंकुमारे य भवियत्तं ॥

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