Book Title: Arhat Vachan 2011 01 04
Author(s): Anupam Jain
Publisher: Kundkund Gyanpith Indore

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Page 109
________________ अर्हत् वचन कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ, इन्दौर टिप्पणी-2 मदुरै की पहाड़ियों का नष्ट होता पुरावैभव ■ हेमन्त कुमार जैन* मदुरै के आसपास कई पहाड़ियों में जैन शिलालेख, मूर्तियां बहुत प्रचीन समय की उत्कीरित हैंइनमें कई गुफाओं में भी है, प्राचीन समय में यहां जैन धर्म का खूब प्रचार था, राजा भी जैन थे - ( पान्डय नरेश) आदि। समय के प्रभाव से इन राजाओं को शैव लोगों ने अपनी चालाकियों से प्रभावित कर लिया और जैन साधुओं के प्रति घृणा व विरोध का वातावरण बना दिया, एक घटना के अनुसार लगभग 8000 जैन साधु एवं श्रावकों को शूली पर चढ़ा कर मार डाला गया व तेलघाणी में पेर दिया। मदुरै के मीनाक्षी मंदिर में म्यूजियम के भित्ति चित्रों में इस घटना का चित्रण किया हुआ है। जहाँ करीब 200 चित्र 10 'x' की साइज के लगभग है और उसका वर्णन प्रत्येक चित्र का अंग्रेजी भाषा में किया हुआ है। इसका उद्देश्य जैनों के प्रति नफरत पैदा करना व उनका मखौल उड़ाना है और भी कई दीवारों में बड़े चित्र तेलघाणी में जैन साधुओं को पेरते हुए दिखाया गया है। यही नहीं याद ताजा करते रहने के लिहाज से प्रतिवर्ष मदुरै के पास ही एक स्थान पर इस घटना की स्मृति में उत्सव मनाया जाता है, जिसके हजारों नर-नारी सोत्साह भाग लेते हैं जैसे हम दशहरे में रावण को मारते हैं। आप इंटरनेट से भी मदुरै के आसपास की पहाड़ियों पर जैन मूर्तियों का सजीव चित्रण देख सकते हैं। इन पहाड़ियों में बहुत अच्छी क्वालिटी का ग्रेनाइट होता है। इसका ठेका व्यापारियों को दिया गया है जो रातदिन यहां विस्फोट करते रहते हैं। डिपार्टमेंट ऑफ आर्कोलाजी का भी कोई डर किसी को नहीं है। विस्फोट से कई जगह दरारें आ रही हैं। यदि समय रहते चेता नहीं गया तो ये हमारी प्राचीन यादगारें सब समाप्त हो जाएगी। शायद विरोधी लोग भी यही चाहते हैं । इसी तरह मैदूरापुर जो चैन्नई में है - वहां अभी एक बड़ा शैव मंदिर है। मंदिर के बाहर एक बहुत बड़ा चौकोर तालाब है जिसमें पानी भरा रहता है। कहते है कि पहले यहां जैन बस्तियां थी । राजा के प्रभाव से जैन समाज को यातनाएं देकर उन्हें वहां से निकाल दिया या मार दिया गया फिर उनके मकानों को नष्ट कर सारा गड़ा हुआ माल लूट लिया गया। यहीं नहीं करीब 15-20 फुट गहरा गड्डा खोदकर जमीन में गढ़ा हुआ सोना चांदी, रकम निकाल ली गई और कालान्तर में उसे बहुत बड़े क्षेत्र को गहरा आयताकार खुदवाकर उसे विशाल तालाब का रूप दे दिया गया। आज उसमें पानी भरा रहता है, उस मंदिर में लगभग 100 विभिन्न साधु सन्यासियों की प्राचीन मूर्तियाँ भी है, यहां आजकल खूब धार्मिक उत्सव आदि होते रहते हैं। ये तो एक दो उदाहरण है ऐसे कई और भी स्थान है जहां प्राचीन जैन स्थापत्य को विनष्ट कर अन्यान्य मान्यताएं जबरदस्ती थोपी गई हैं। जैसे वैलोर में अर्काट की पहाड़ियों में ऊपर शिखर बंद मंदिर में एक बड़ी पद्मासन प्रतिमा को उखाड़ दिया और उसके निशान साफ नजर आते हैं। कमरे में शिवलिंग स्थापित है गुफाएं भी हैं नीचे गुफाओं में जैन शिलालेख मूर्तियां पुरातत्व विभाग के आधीन हैं शिखर तक जाने के लिए बड़ी विशाल सीड़ियां निर्मित हैं, गाँव में एक भी जैन नहीं है तो देख-रेख कौन करें ? यह सवाल है। अर्हत् वचन 23 (1-2), 2011 " 109

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