Book Title: Arhat Vachan 2011 01 04
Author(s): Anupam Jain
Publisher: Kundkund Gyanpith Indore

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Page 129
________________ विद्वत् संगोष्ठी सम्पन्न क्लर्क कालोनी, इन्दौर, 16.02.11 महोपवासी, परम तपस्वी, आचार्य श्री सन्मतिसागर जी महाराज के जन्म दिवस के अवसर पर परम्परा के पट्टाधीश आचार्य श्री योगीन्द्रसागर जी महाराज के ससंघ पावन सान्निध्य में 16 फरवरी 2011 को 2 सत्रों में विद्वत् संगोष्ठी का आयोजन किया गया। डॉ. सविता जैन के निर्देशन में आयोजित इस संगोष्ठी का संयोजन तीर्थंकर ऋषभदेव जैन विद्वत् महासंघ के महामंत्री डॉ. अनुपम जैन ने किया। 16.02.2011, प्रात: 9.00 बजे, प्रथम सत्र- डॉ. सुरेन्द्र कुमार जैन 'भारती', महामंत्रीभारतवर्षीय दिगम्बर जैन विद्वत् परिषद् की अध्यक्षता तथा दिगम्बर जैन महासमिति मध्यांचल के अध्यक्ष श्री सुरेन्द्र बाकलीवाल के मुख्य आतिथ्य में सम्पन्न इस सत्र का मंगलाचरण डॉ. संगीता विनायका ने किया । सत्र में पं. शीतलचंद जैन-ललितपुर, डॉ. सुशीला सालगिया-इन्दौर, श्रीमती उषा पाटनीइन्दौर, ब्र. अनिल जैन 'शास्त्री' -इन्दौर एवं श्री रमेश कासलीवाल-इन्दौर ने अपने विचार व्यक्त किये। पं. शीतलचंद जैन, ललितपुर ने कहा कि आचार्य सन्मतिसागरजी महाराज महान तपस्वी एवं वचन ऋद्धि के धारी थे। उनकी समाधि के उपरान्त वरिष्ठतम् दीक्षित शिष्य बालाचार्य श्री योगीन्द्रसागर जी महाराज को उनके पट पर सुशोभित कर आगमानुसार अनुकरणीय कार्य किया गया है । सत्र के अध्यक्ष श्री सुरेन्द्र कुमार 'भारती' बुरहानपुर ने कहा कि आगम के अनुसार बालाचार्य को ही आचार्य का पद प्रदान किया जाता है। आचार्य श्री सन्मतिसागरजी ने जितने दिन उपवास किये उससे कम दिन आहार ग्रहण किया। ऐसे तपस्वी के दर्शन मात्र से ही वैराग्य के भाव बनते हैं। आचार्य श्री योगीन्द्रसागर जी महाराज ने अपने दीक्षागुरु आचार्य श्री सन्मतिसागर जी के जीवन विशेषत: उनके वात्सल्य के संस्मरणों को सुनाया और बताया कि उन जैसा संत दूसरा नहीं है। आपने बताया कि सन्मतिसागरजी कहते थे 'संयम पर तू ध्यान रखना । सारी विद्यायें स्वयं सिद्ध हो जायेगी और विद्या प्राप्त होते ही चमत्कार हो जायेगा।' 16.02.11, मध्यान्द 2.00 बजे, द्वितीय सत्र-यह सत्र पं. पद्मचन्द जैन 'शास्त्री'-पानीपत की अध्यक्षता में श्रीमती उषा पाटनी के मंगलाचरण से प्रारंभ हुआ। इस सत्र में श्री राजेन्द्र जैन-सनावद, श्री जयसेन जैन-इन्दौर, श्री नरेश पाठक-पन्ना, डॉ. अनुपम जैन-इन्दौर, डॉ. संगीता विनायकाइन्दौर, डॉ. सुरेखा मिश्रा-इन्दौर एवं श्री अशोक शास्त्री-इन्दौर ने पूज्य आचार्य श्री सन्मतिसागरजी के दीर्घ तपस्वी एवं संयमित जीवन पर विचार रखें। सभी वक्ताओं ने प्रतिपादित किया कि इन्दौर की समाज ने आचार्य श्री के पटट् पर आचार्य श्री योगीन्द्रसागरजी महाराज को प्रतिष्ठित कर संस्कृति की महान सेवा की है और आशा व्यक्त की कि लगभग 150 दीक्षायें देकर आचार्य श्री सन्मतिसागर जी ने जैन संस्कृति की जो महान सेवा की है उस क्रम को आगे बढ़ाते हुए आप अपने साहित्यिक अवदानों और आगमोक्त चर्या के माध्यम से इस क्रम को आगे बढ़ायेंगे। दिगम्बर जैन समाज, क्लर्क कालोनी द्वारा शाल, श्रीफल एवं सम्मान राशि द्वारा सभी विद्वानों का सम्मान किया गया। पूज्य आचार्य श्री के मंगल आशीर्वचन से संगोष्ठी का समापन हुआ। रमेश कासलीवाल सम्पादक-वीर निकलंक अर्हत् वचन, 23 (1-2),2011 129

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