Book Title: Arhat Vachan 2011 01 04
Author(s): Anupam Jain
Publisher: Kundkund Gyanpith Indore

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Page 115
________________ 2. श्री नीलांशु कौशिक, रायपुर एवं श्री सचिन तिवारी, पटना Extinction in the Late Quaternary Period 3.डॉ. एस.एस. एल. श्रीवास्तव, मेरठ Cultural and Economical Scenatio or the Indian Villegaes in the past 4.डॉ.सुरेखा मिश्रा, इन्दौर एवं डॉ. अनुपम जैन, इन्दौर मध्यप्रदेश के जैन शास्त्र भंडारों में उपलब्ध प्रमख पांडलिपियां 5. डॉ. पुण्य बरुआ Indian Civilization Through Millenia : Focussed Through the Parables 6.डॉ.चन्द्र प्रकाश सिंह बीसवी सदी के पूर्वार्द्ध में नारी स्वातंत्र्य चेतना 7. डॉ. सुचित्रा मलिक, हरिद्वार नारी: प्राचीन युग से आज तक 8.डॉ. वीणा विश्नोई शर्मा, हरिद्वार अथर्ववेदे : दैवी चिकित्सायाःस्वरुपम् 9.डॉ. मुदिता अग्निहोत्री कागर की आग : एक कुँमाउनी महिला की कहानी 10. डॉ. रेखा रानी तिवारी श्रीमद्भगवदगीता में कर्मयोग 11.प्रो. श्याम एन. पाण्डेय, हस्तिनापुर : विकासशील महासखा वर्म का मूल स्थान 12. डॉ. स्नेहरानी जैन, सागर जम्बद्वीप 13. ब्र. स्वाति जैन, जैन धर्म हस्तिनापुर निम्न आलेख समयाभाव जैन धर्म पढ़े स्वीकार किये गये :14. डॉ. शिवाली अग्रवाल Empowerment of Women in Ancient India ! A Myth or Reality 15.डॉ. नीलिमा गुप्ता भारतीय संस्कृति पर लोक कलाओं का प्रभाव 16. डॉ. दीप्ति कौशिक A Journey - Women hood to Manhood: A Socio Economic Perspective इसके अतिरिक्त अनेक विद्वानों में अपने आलेख प्रेषित किये उनमें से समय से प्राप्त होने वाले आलेखों में से कुछ का प्रकाशन Proceeding में किया गया एवं कुछ श्रेष्ठ आलेख विलम्ब से प्राप्त होने के कारण प्रकाशित नहीं हो सके। सम्मेलन में उनके न पधारने अथवा निर्धारित सत्र में विलम्ब से पधारने के कारण उनका वाचन भी न हो सका। ऐसे आलेखों का ICTM-2010 के विस्तृत कार्यक्रम में उल्लेख है। 31.10.2010 अपरान्ह 2.00-03.30 बजे, समापन सत्र:अध्यक्षता : प्रो. अनूप स्वरूप, कुलपति-शोभित वि.वि., मेरठ वि. अतिथि : श्री वरुण अग्रवाल, निदेशक-इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, कोलकाता संचालन : डॉ. अनुपम जैन, निदेशक - गणिनी ज्ञानमती शोधपीठ, इन्दौर कार्यक्रम का प्रारंभ पीठाधीश क्षुल्लक श्री मोतीसागर जी महाराज के मंगलाचरण से प्रारंभ हआ। आपने कहा कि भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति का सम्मेलन हस्तिनापुर में आयोजित होना एक सराहनीय कदम है। अर्हत् वचन, 23 (1-2),2011 115

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