Book Title: Anusandhan 2008 06 SrNo 44
Author(s): Shilchandrasuri
Publisher: Kalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad

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Page 75
________________ ६८ अनुसन्धान ४४ ८३-१०१ महावीरप्रभुना ११ गणधरोनां १२ द्वारोनुं निरूपण. १०२-११४ १२ चक्रवर्तीओनां स्थानोनु वर्णन. ११५-१३५ ९-९ बलदेव-वासुदेवनां स्थानोनुं वर्णन. १३६-१३८ चक्रवर्तिओ कया तीर्थकरना शासनमां थया. १३९-१४१ वासुदेवो कया तीर्थङ्करना शासनमां थया. १४२-१४६ ऐरवतक्षेत्रमा वर्तता २४ तीर्थङ्करनां नाम. १४९-१५० भरतक्षेत्रमा थनारा २४ तीर्थङ्करनां नाम. १५१-१५३ भरतक्षेत्रमा वर्तमान २४ तीर्थंकरना पूर्वभवनां नाम १५८-१६१ भरतक्षेत्रमा थनारा चक्रवर्ति-बलदेव-वासुदेव-प्रतिवासुदेवनां नाम. १६२-१६८ ऐवतक्षेत्रमा थनारा २४ तीर्थङ्करोनां नाम. १६९-१७१ महाविदेहमा वर्तमान २० विहरमाननां नाम. १७२ ९ नपरदनां नाम. १७३-१७४ ११ रुद्रनां नाम. १७८-१८४ ७ कुलकरोतुं निरूपण. अन्ते, आ बधां ज स्थानो समवाय-आवश्यकादि अनेक ग्रन्थोमांथी उद्धरीने अत्र एकत्रित कर्या छे, एम कर्ता लखे छे. आ ग्रन्थनी रचना श्रीउत्तमऋषि नामना मुनिए विक्रमना १६८७ना वर्षे चैत्रशुद तेरसना दिवसे करी छे, तेम ग्रन्थनी आ गाथा - विक्कमवच्छराओ य वसुअट्ठकालेण महुमासेणं । सियपक्खे तेरसी रइया उत्तमेण सुद्धेण ॥१८६।। द्वारा स्पष्ट थाय छे. ग्रन्थकारनां नाम सिवाय तेमना गुरुनुं नाम, तेमनी परम्परा, कया स्थाने रचना करी-इत्यादि कोई ज वातनो उल्लेख मळतो नथी. आ प्रति मुनिभक्तिविजय ज्ञानभण्डार (श्रीजैन-आत्मानन्द सभा) .. भावनगरथी प्राप्त थयेल छे. प्रतिनी झेरोक्स आपवा बदल भण्डारना कार्यकर्तानो आभार मानीए छीए. Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org

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