Book Title: Agam Sutra Satik 18 Jamboodwippragnapati UpangSutra 07
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan

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Page 516
________________ वक्षस्कारः-७ ५१३ मासंसि सोलसंगुलपोरिसीए छायाए सूरिए अणुपरिअट्टइ, तस्सणंमासस्स चरमे दिवसे तिण्णि . पयाइं चत्तारि अंगुलाई पोरिसी भवइ। हेमंताणंभंते! पढममासंकति नक्खत्तानेंति?,गो०! तिन्नि-कतिआरोहिणी मिगसिरं, कत्तिआचउद्दस रोहिणी पन्नरस मिगसिरंएगंअहोरत्तंनेइ, तंसिचणंमासंसिवीसंगुलपोरिसीए छायाए सूरिए अणुपरिअट्टइ, तस्स णं मासस्सजे से चरिमे दिवसे तंसि च णं दिवसंसि तिन्नि पयाइं अट्ठय अंगुलाई पोरिसी भवइ । __ हेमंताणं भंते ! दोन्नं मासं कति नक्खत्ता नेति ?, गोअमा ! चत्तारि नक्खत्ता नेति, तंजहा-मिअसिरं अद्दा पुणव्वसूपुस्सो, मिअसिरंचउद्दस राइंदिआई नेइ अद्दा अट्ठ नेइ पुणव्वसू सतराइंदिआईपुस्सोएगराइंदिअंनेइ, तयाणंचउब्बीसंगुलपोरिसीएछायाए सूरिए अणुपरिअट्टइ, तस्सणं मासस्स जे से चरिमे दिवसे तंसिचणं दिवसंसि लेहट्ठाईचत्तारि पयाइंपोरिसी भवइ। हेमंताणंभंते! तच्चं मासं कतिनक्खत्तानेंति?,गोअमा! तिन्नि-पुस्सोअसिलेसामहा, पुस्सो चोद्दस राइंदिआई नेइ असिलेसा पन्नरस महा एवं, तया णं वीसंगुलपोरिसीए छायाए सूरिए अणुपरिअट्टइ, तस्स णं मासस्स जे से चरिमे दिवसे तंसि च मं दिवसंसि तिण्णि पयाई अद्वंगुलाई पोरिसी भवइ । हेमंताणं भंते ! चउत्थं मासं कति नक्खत्ता नेति?, गोअमा! तिन्नि ण०, तं०–महा पुव्वाफग्गुणी उत्तरफग्गुणी, महा चउद्दस राइंदिआई नेइ पुव्वाफग्गुणी पन्नरस राइंदिआई नेइ उत्तराफग्गुणी एग राइंदिअं नेइ, तया णं सोलसंगुलपोरिसीए छायाए सूरिए अणुपरिअठ्ठइ, तस्स णं मासस्स जे से चरिमे दिवसे तंसि च णं दिवसंसि तिन्नि पयाइं चत्तारि अंगुलाई पोरिसी भवइ। गिम्हाणं भंते ! पढमं मासं कति नक्खत्ता नेति ?, गोअमा ! तिन्नि नक्खत्ता ऐतिउत्तराफग्गुणी हत्थो चित्ता, उत्तराफग्गुणी चउद्दस राइंदिआई नेइ हत्थो पन्नरस राइंदिआई नेइ चित्ता एगराइंदिअं नेइ, तयाणं दुवालसंगुलपोरिसीए छायाए सूरिए अणुपरिअट्टइ, तस्स णं मासस्स जे से चरिमे दिवसे तंसि चणं दिवसंसि लेहट्ठाइं तिन्नि पयाई पोरिसी भवइ । गिम्हाणं भंते! दोच्चंमासंकति नक्खत्ताणेति?, गोअमा! तिन्निनक्खत्तानेति, तं०-चित्ता साई विसाहा, चित्ताधउद्दस राइंदिआई नेइ साई पन्नरस राइंदिआई नेइ विसाहा एगं राइंदिअं नेइ, तया णं अटुंगुलपोरिसीए छायाए सूरिए अणुपरिअट्टइ, तस्स णं मासस्सजे से चमि दिवसे तंसिचणं दिवसंसि दो पयाइं अटुंगुलाई पोरिसी भवइ । गिम्हाणं भंते! तच्चं मासं कति नक्खत्ता नेति?, गो०! चत्तारि नक्खत्ता नेति, तंजहाविसाहाऽणुराहा जेट्टा मुलो, विसाहा चउद्दस राइंदिआई नेइ अणुराहा अट्ठ राइंदिआई नेइ जेठा सत्त राइंदिआईनेइ मूलो एवं राइंदिअं, तयाणंचउरंगुलपोरिसीए छायाए सूरिएअणुपरिअट्टइ, तस्सणंमासस्सजेसे चरिमे दिवसेतंसिचणंदिवसंसि दोपयाईचत्तारियअंगुलाइ, पोरिसी भवइ। ___ गिम्हाणं भंते! चउत्थं मासं कति नक्खत्ता ति?, गोअमा! तिन्नि नक्खत्ता नेंति, तं०मूलो पुव्वासाढा उत्तरासाढा, मूलो चउद्दस राइंदिआई नेइ पुव्वासाढा पन्नरस राइंदिआई नेइ उत्तरासाढा एगं राइदिअं नेइ, तया णं वट्टाए समचउरंससंठाणसंठिआए नग्गोहपरिमण्डलाए [13/33] Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org

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