Book Title: Suyagadanga Sutra
Author(s): Sudharmaswami, 
Publisher: ZZZ Unknown

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Page 89
________________ 152 जेएनत्यसमनियापे पयप्तिा नेदमादें कोई कबडीवकाय नंद्य पथची नावनत्रयकाय कंबहीवकायमाहिएकरिष्य जळपावडी प्राश्रीप्रतिज्ञाकर था काय थवीकायाकरी कार्यकरिखें। सpsinil Saसनिशिदियापयतमातेसिंबधीसिकारातविकायेजाबतसकाटोसंगमतिद्धनिकारणे सुनने वाई करावई तेस्ने एमोनियम एमनिया पिण पृथवीकायोकरी कार्यकर्फ नथाकरावं निषेधार्थ किकरेंसिविकासवबिनस्व भबति एवखनुहोदविकारणे' किच्चकारमिविकारावमिविधिव नपुरषकरतोन यागजिंकहा यवी कायनो काय करतोन करावलोपिण तेपुरूषणेघववीकायको असन ची पहनो नया अनि हनन सिएनवनीशामणवाश्सेयनेणेषुद्धविकारणोकिविकोतिविकारावतिविसियनानयुधिकायाम अविरत ज्यप्रनिदतपचखाकरी पापकर्मबोलाई मबई ब्रमकायमाश्रीपिण रमन रहनीपर कोरकपुरूष जोराये जेजेकायनीजीवका या कर विरनिनेनेहलोक समविस्तापडिस्यपश्चस्वायपावकाममाविनवति एवंजावसकाएननाणियबामएमतिaaहिंजीव मलागाई, कर्मकाई करा नेर पुरुष स्वोदो एमनियर कंपिल की वक्रायनो कार्यकरस्यु कराव निकाएहिं किचकारनिविकारावंतिविस्मगौएवैनवति एवखसुमहे बधावनिकाएहिकिकामिविका मन पुतिप्ने एवं नो श्मेण नेपुरष ढहीदकायनेविष रयानपाले नपलाय पुरुष नाव शवलिविणेवेवणासएनवानामहिंवारामटयातहिदिजीवनिकाएहिंजावकारावंतिबिसियानमिafall कायाईक अमेजन अविरन अत्रनित अपञ्चदाणेकरी पाकमलिग मापानिपात जाव३भिमादर्शनशम जीवनकाहिं अस्सनयमविरयानडिस्य अपवरकाययावकारमतयाणा तिवारजावंनिवासासछे र निशाई जगवन कषु असंगती अविरनि अप्रनिहन पञ्चरवालेका पापकन सुप्रीनरेंगदा पिल पापकमला पसरवचुभगबताअखायमसंनएमविशनि अपडिहमपचरकामपाबकाम्म मुविणविमसमपनपाव नेह

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