Book Title: Surdipikadi Prakaran Sangraha
Author(s): Purvacharyadi, Mangaldas Lalubhai
Publisher: Mangaldas Lalubhai
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परोपकारी प्रमाणिक प्रनाविक पुरुषोनां वचनोने स्वार्थीवचनो मानवां ए आपणी नूल नहि तो बीजु शुं गणाय ? एमनां विशुद्ध वचनोने हैयाना उमलकासाथ हीरा मोतीथी वधावी | लेवांज जोश्ये ..
• आपणा मुख्य पूर्वाचार्यजी के जेमनां रचेलां प्रकरणो या पुस्तकनी अंदर विशेष ने ते श्री पार्श्वचं सूरीश्वरजी महान् प्रनावशाली पुरुष हता अने जैनशासनना उत्तमोत्तम उद्योतकारी होवाथी अद्यापि लगण तेमना वचनानुसार चालनार हजारो सेवक विद्यमान ले. ते साहेबजी बुराजनी तलेटीमा आवेला हमीरपुरमा संवत १५३७ जन्म धरी पोरवामवंशी, वेळ.
गशाह पिता अने विमलादेवी माताने महत्तावंत कर्यां इता. ते कुसाग्र बुद्धिवंत महत् पुरुषने || | विद्या तो सुप्रसन्नज हती, तेमज ते सुखनबोधी इता, जेथी गुरुराज श्री साधुरत्न पंमितराजना || ||
उपदेशथी बांध पामी संवत १५४६ नो सालमां फक्त नव वर्षनी किशोरवयमांज दीक्षाअंगीकार || करी कुलनो उद्धार को हतो.
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