Book Title: Praudh Apbhramsa Rachna Saurabh Part 1
Author(s): Kamalchand Sogani
Publisher: Apbhramsa Sahitya Academy

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Page 179
________________ (1) (2) (3) 82. लह=पाना लहि, लहिउ, लहिवि, लहवि, लहेवि, लहेत्रिणु, लहेप्पि, लहेप्पिणु लहेवं, लहण, लहणहं, लहणहिं, लहेवि, लहे विणु, __ लहेप्पि, लहेप्पिणु 83. लिह-लिखना लिहि, लिहिउ, लिहिवि, लिहवि, लिहेवि, लिहेविणु, लिहेप्पि, लिहेप्पिणु लिहेवं, लिहण, लिहणहिं, लिहणह, लिहेवि, लिहेविणु, लिहेप्पि, लिहेप्पिणु 84. लुह = पोंछना लुहि, लुहिउ, लुहिवि, लुहवि, लुहेवि, लुहेविणु, लुहेप्पि, लुहेप्पिणु लुहेवं, लुहण, लुहणहं, लुहणहिं, लुहेवि, लुहेविणु, लुहेप्पि, लुहेप्पिणु 85. वंद-वंदना करना वंदि, वंदिउउ, वंदिवि, वंदवि, वंदेवि, वंदेविणु, वंदेप्पि, वंदेप्पिणु वंदेवं, वंदण, वंदणहं, वंदणहिं, वंदेवि, वंदेविणु, वंदेप्पि, वंदेप्पिणु 86. वल-लौटना वलि, वलिउ, वलिवि, वलवि, वलेवि, वलेविणु, वलेप्पि, वलेप्पिणु वलेवं, वलण, वलणह, वलणहिं, वलेवि, वलेविणु, वलेप्पि, वलेप्पिणु 87. बस-रहना वसि, वसिउ, वसिवि, वसवि, वसेवि, वसे विणु, वसे प्पि, वसेप्पिणु वसेवं, वसण, वसणहं, वसहिं, वसेवि, वसे विणु, वसे प्पि, व से प्पिणु xxxvi ] [ प्रौढ अपभ्रंश रचना सौरम Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org

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