Book Title: Prakrit Sikhe
Author(s): Premsuman Jain
Publisher: Hirabhaiya Prakashan

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Page 65
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir बहुब्रीहि जब दो या दो से अधिक शब्द मिलकर किसी अन्य का विशेषण बनते हों तो उस समास को बहुब्रीहि कहते हैं; यथा-जिओ कामो जेण सो=जिअकामो (काम का जीतने वाला), न अत्थि भयं जस्स सो=अभयो (निडर), पीअं अंबरं जस्स सो-पीअंबरो (पीले वस्त्र वाला), पुण्णेण सह-सपुण्णो (पुण्यसहित), जिआ परीसहा जेण सो=जिअपरीसहो (परीषह जीतने वाला)। तद्धित प्रयोग प्राकृत में कुछ ऐसे शब्दों का भी प्रयोग होता है, जो तद्धित के प्रत्ययों द्वारा निर्मित होते हैं । तद्धित के कुछ शब्द इस प्रकार हैं : केर-अम्हकेरं हमारा, तुम्हकेरं तुम्हारा, परकेरंपराया। इल्ल--गामिल्लं ग्रामीण, पुरिल्लं =नागरिक । उल्ल--अप्पुल्लं=आत्मा में उत्पन्न, तरुल्लं=वृक्ष के नीचे उत्पन्न हुआ। अ--सिव+अ (सेवो)=शिव का पुत्र शंव, दसरह +अ (दासरहो)=दशरथ का पुत्र । तण--मणअ+त्तण>मणुअत्तणं = मनुष्यता, पीण+त्तण> पीणत्तण स्थूलता, बाल+त्तण. बालत्तण=बचपन। हुत्तं-एयहुत्तं =एक बार, दुहुत्तं दो बार, सयहुत्तं=सौ बार। आल-रसालो= रसवाला, जटालो=जटावाला। आलु-दया+-आलु>दयालु =दयावाला, लज्जा + आलु> लज्जालु लज्जावाला। इल्ल--छाइल्लो छायावाला, घामिल्लो घामवाला। मंत-हणुमंतो-हनुमान, सिरीमतो=धनवान, भक्तिवंतो= भक्तिवाला, इत्यादि। प्राकृत सीखें : ६४ For Private and Personal Use Only

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