Book Title: Jjagad Guru Aacharya Vijay Hirsuriji Maharaj
Author(s): Rushabhratnavijay
Publisher: Jagadguru Hirsurishwarji Ahimsa Sangathan
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मूर्तिहाल जालोर राजस्थान तपावास में
नेमिनाथजी के मंदिर से
श्री जगद्गुर स्थापना मंत्र
(१) आह्वान मंत्र (आह्वान मुद्रा करके बोले)
ॐ हीं श्रीं अहँ युगप्रधान भट्टारक श्री हीरविजयसूरि जगद् गुरो ! अत्र अवतर अवतर स्वाहा । स्थापना मंत्र (स्थापनामुद्रा करके बोले) ॐ हीं श्रीं अहँ युगप्रधान भट्टारक श्री हीरविजयसूरि जगद् गुरू ! अत्र तिष्ठः तिष्ठः ठः ठः ठः स्वाहा । सन्निधि करण मंत्र - ॐ हीं श्रीं अहँ युगप्रधान भट्टारक श्री हीरविजयसूरि जगद्गुरू मम सन्निहितो भव भव वषट् स्वाहा ।
जगद्गुर की अष्ट प्रकारी पूजा की सामग्री
(१) पंचामृत कलश (२) केशर चंदन (३) फूल, फूलमाला (४) धूप
(५) दीपक (६) अक्षत (७) नैवेध (८) फल
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