Book Title: Jain Vidya 12
Author(s): Pravinchandra Jain & Others
Publisher: Jain Vidya Samsthan

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Page 20
________________ जैनविद्या-12 योगी क्या चाहता है/करता है इच्छत्येकान्तसंवासं निर्जनं जनितादरः । निजकार्यवशाकिञ्जि दुक्त्वा विस्मरति द्रुतम् ॥ ४० ॥ ___ भावार्थ-सच्चा योगी जनशून्य स्थान में रहना पसंद करता है अतः वह एकान्त स्थान चाहता है । वह अपने काम से ही थोड़ा कहकर फिर उसे शीघ्र ही भूल जाता है । --इष्टोपदेश : प्राचार्य पूज्यपाद

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