Book Title: Jain Pratimavigyan
Author(s): Maruti Nandan Prasad Tiwari
Publisher: Parshwanath Shodhpith Varanasi

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Page 302
________________ २८४ [ जैन प्रतिमाविज्ञान राव, एस० एच०, 'जैनिजम इन दि डकन', ज०ई०हि०, खं० २६, भाग १-३, १९४८, पृ० ४५-४९ राव, टी० ए० गोपीनाथ, एलिमेण्ट्स ऑव हिन्दू आइकानोग्राफी, खं० १, भाग २, दिल्ली, १९७१ (पु०मु०) राव, बी० वी० कृष्ण, 'जैनिजम इन आन्ध्रदेश', ज००हि०रि०सो०, खं० १२, पृ० १८५-९६ राव, वाई० वी०, 'जैन स्टैचूज इन आन्ध्र', ज००हिरि०सो०, खं० २९, भाग ३-४, जनवरी-जुलाई १९६४, पृ० १९ रे, निहाररंजन, मौर्य ऐण्ड शुंग आर्ट, कलकत्ता, १९६५ रोलैण्ड, बेन्जामिन, दि आर्ट एण्ड आर्किटेक्चर आंव इण्डिया : बुद्धिस्ट-हिन्दू-जैन, लन्दन, १९५३ लालवानी, गणेश (सं.), जैन जर्नल (महावीर जयंती स्पेशल नंबर), खं० ३, अं० ४, अप्रैल १९६९ ल्यूजे-डे-ल्यू, जे० ई० वान, दि सीथियन पिरियड, लिडेन, १९४९ वत्स, एम० एस०, ‘ए नोट ऑन टू इमेजेज़ फ्राम बनीपार महाराज ऐण्ड बैजनाथ', आ०स०ई०ऐ०रि०, १९२९-३० पृ०२२७-२८ विजयमूर्ति (सं०), ०शि०सं०, माणिकचंद्र दिगंबर जैन ग्रंथमाला, भाग २, बंबई, १९५२; भाग ३, बंबई, १९५७ विण्टरनित्ज, एम०, ए हिस्ट्री ऑव इण्डियन लिट्रेचर, खं० २ (बुद्धिस्ट ऐण्ड जैन लिट्रेचर), कलकत्ता, १९३३ .. विरजी, कृष्णकुमारी जे०, ऐन्शण्ट हिस्ट्री ऑव सौराष्ट्र, बंबई, १९५२ वेंकटरमन, के० आर०, 'दि जैनज इन दि पुडुकोट्टा स्टेट', जैन एण्टि०, खं० ३, अं० ४, मार्च १९३८, पृ० १०३-०६ वैशाखीय, महेन्द्रकुमार, 'कृष्ण इन दि जैन केनन्', भारतीय विद्या, खं० ८ (न्यू सिरीज), अं० ९-१०, सितंबर-अक्टूबर १९४६, पृ० १२३-३१ वोगेल, जे० पीएच०, केटलाग ऑव दि आकिअलाजिकल म्यूजियम ऐट मथुरा, इलाहाबाद, १९१० Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org

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