Book Title: Charitra Puja - Panchtirth Puja - Panch Parmeshthi Puja Sangraha
Author(s): Vijayvallabhsuri
Publisher: Jain Atmanand Sabha
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ब्रह्मचर्यप्रभाव.
-पर
पंचमहत्वयसुवयमूलं, समणमणाइलसाहुसुचिन्नं । । वेरविरामणपञ्जवसाणं, सव्वसमुद्दमहोदधितित्थं ॥१॥ तित्थकरेहि सुदेसियमग्गं, नरयतिरिच्छविवजियमग्गं । सवपवित्तिसुनिम्मियसारं, सिद्धिविमाणअवंगुयदारं ॥२॥ देवनरिंदनमंसियपूयं, सबजगुत्तममंगलमग्गं । दुद्धरिसं गुणनायकमेकं, मोक्खपहस्स वडिंसगभूयं ॥३॥
(श्रीप्रश्नव्याकरणसूत्र) ब्राह्मीसुन्दराजीमतीचन्दनागणधराया । अपि देवमनुजमहिता विख्याताः शीलसत्त्वाभ्याम् ॥१॥
( उत्तरा० बृहद्वृत्ति ३६.)
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