Book Title: Ardhamagadhi kosha Part 3
Author(s): Ratnachandra Maharaj
Publisher: Motilal Banarasidas

View full book text
Previous | Next

Page 607
________________ पुण्णमहकूड.] [ पुण्णसेण. (૫) વાણિજ્ય ગામ નિવાસી એક ગૃહસ્થ १२; (२) मासवत पतना नव टमार्नु કે જેણે મહાવીર સ્વામી પાસે દીક્ષા લઈ याभुंट-२५२. मालवंत पर्वतके नौ कटो પાંચ વર્ષની પ્રવજ્યા પાળી વિપુલ પર્વત मेंसे आठवा कूट. The 8th of the उप२ संथा। 31 मि&ि भेगवी. वाणिज्य 9 peaks of Mālvanta. to go ग्राम निवासी एक गृहस्थ जिसने महावीर स्वा से पुण्णभद्दय. पुं० ( पूर्णभद्रक ) यंपा नगरानी दीवाले पांच वर्षों की प्रव्रज्या पाली, विपुल पर्वत पर हारने मे मगीयो. कामा नगरीके बाहरका संथारा किया और सिद्धि प्रातकी. A resi- एक बगीवा. A garden outside the dent of Våņijjya village who city of champā. भग० ६, ३३; being initiated by the lord पुण्णमासिणी. स्त्री० ( पौर्णमासी) पूनम. Mahavira, remained an asce. पूनम, पौर्णिमा; पूर्णिमा. The last date tic for five years and attain. of the bright-half of a month. ed salvatiou aster fasting for सा० ६, २; भा० २, ५, ३, ३; नाया• a mouth on the Vipula mount. २; ; राय० २२५; भंत. ६, ११; (6) या नगरीत मारनु पुराणमासी. स्त्री. (पौर्णमासी ) पूणिभा; मे धान. चम्पा नगरीके बाहरका एक उद्यान. पूनेभ. पूर्णिमा; पूनम. The last date A garden outside the city of the bright-half of a mouth. of Champā. मत० १, १; नाया० १; | जं. प. ७, १५१; सन० ३६; उत्त. ११, माया० ध० ४; (७) संभूतिपयना | २५; जीवा० ३, ४; शिष्यतुं नाम. संमृतिविजयके शिव्यका नाम. पुण्णरक्ख. पुं० ( पूर्णरक्ष ) पूरक्ष नामे Name of the disciple of Sam. विता. पूर्णरक्ष नामक एक देवता. A bhāti Vijaya. कप्प०८, (८) पु आ god named Purnaraksa. भग. संपर्नु पाय मध्ययन. पुफिया सूत्रक। पांचवां मध्ययन. The 5th chapter of पुराणसेण. पुं० ( पूर्णसेन ) तपाई Pupphiya Sutra. निर० ३, १, સૂત્રના બીજા વર્ગના તેરમા અધ્યયનનું --चेय. न० (-चैत्य ) 14नगर नाम. अणुत्तरोक्वाइ सूत्रके दूसरे वर्गके तेरहवें पारनु पूल नामे यत्य-उधान. पा अध्ययनका नाम. Name of the 13th नगरोके बाहरका पूर्णभद्र नामक चैत्य-उद्यान. chapter of the 2ņd group of A memorial garden named Anuttarovavai Satra. अणुत्त० २, Purņabhadra outside the city १३; (२) श्रेणि सनी धारवाना of champa. नाया० ६; १२; १५, પુત્ર કે જે દીક્ષા લઈ ૧૧ અંગભણી ગુણ नाया. घ. ४; રયણ તપ આચરી સોળ વર્ષની પ્રવજ્યા पुराणभहकूड. पु. ( पूर्णभद्रकूट ) वैता८य પાળી વિપુલ પર્વત ઉપર એક માસનો સંપર્વત ઉપરના નવ ફૂટમાંનું છઠું શિખર. થારે કરી સર્વાર્થસિદ્ધ મહાવિમાને ઉત્પન્ન वैताब्य पर्वत परके नौ कूटोंमें से कठा कूट. The થયા, ત્યાંથી એક અવતાર કરી મેક્ષે જશે. 6th of the 9 peaks on the श्रणिक राजाकी धारिणीदेवीक पुत्र, जिन्होंने Vaitadhya mount. जं. ५० १, दीक्षा लेकर ११ अंगोंका मध्ययन किया, गुण Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org

Loading...

Page Navigation
1 ... 605 606 607 608 609 610 611 612 613 614 615 616 617 618 619 620 621 622 623 624 625 626 627 628 629 630 631 632 633 634 635 636 637 638 639 640 641 642 643 644 645 646 647 648 649 650 651 652 653 654 655 656 657 658 659 660 661 662 663 664 665 666 667 668 669 670 671 672 673 674 675 676 677 678 679 680 681 682 683 684 685 686 687 688 689 690 691 692 693 694 695 696 697 698 699 700 701 702 703 704 705