Book Title: Anusandhan 2015 03 SrNo 66
Author(s): Shilchandrasuri
Publisher: Kalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad

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Page 154
________________ फेब्रुआरी - २०१५ १४५ सम्पूर्ण पद्यो नोंध्यां छे. पाठशुद्धिनी दृष्टि तो आ पद्यो महत्त्वनां छे ज, पण उपर जे प्रयास अंगे वात करी ते रीते पण तेमनुं महत्त्व ओर्छ नथी. अत्यारे उदाहरणोनां मूल सम्पूर्ण पद्यो केटलेक ठेकाणे मूल प्राकृत व्याकरणमा ज प्रवेशी गयां छे;* तो भायाणीसाहेबे जे सामग्री सङ्कलित करीने आपी छे, तेना आधारे पण घणां मूल पद्यो आपणने सांपडे छे. तो पण आ टिप्पणीमांथी लगभग १८ जेटलां मूल पद्यो नवां जडे छे. अत्यार सुधी अज्ञात रहेलां १८ पद्यो ओक साथे मळे ते केटली आनन्ददायक वात छे ! आ सम्पूर्ण पद्यो उपलब्ध थतां तेटलां उदाहरणोनां मूल स्रोत शोधवा तो सहेलां बनशे ज; पण आमांथी जे पद्यो कालकवलित कृतिओनां हशे, ते तो पुनर्जीवित ज गणवानां ! पद्योनी नोंध अत्रे व्याकरणना सूत्रक्रमे आपी छे. पद्योनी संस्कृत छाया करवामां पूज्य मुनिराज श्रीकल्याणकीर्तिविजयजी म.नो अमूल्य सहयोग मळ्यो छे. सूत्र १. ८४ दिटिक्कथणवढे आम्ब(?)लवलिअवामोरू-वल्लरीलंघिएयरोरुजुअं । तंसट्ठियदरपरिअत्ति-अंगदिट्ठिक्कथणवढें ॥ (आम्बल(?)वलितवामोरू-वल्लरीलवितेतरोरुयुगम् । त्र्यस्रस्थितदरपरिवर्तिताङ्गदृष्टैकस्तनपट्टम् ॥) सूत्र २.१२० हरए महपुंडरिए पउमे च महापउमे तेगिच्छी केसरी दहे चेव । हरए महपुंडरिए पुंडरिए चेव उ दहाओ ॥ (पद्मश्च महापद्मः तेगिच्छी केसरी हुदश्चैव । . हृदश्च महापुण्डरीकः पुण्डरीक एव तु द्रहाः ॥) * जेमके सूत्र ६मां मूल उदाहरण तो 'गूढोअरतामरसाणुसारिणी' अटलुं ज हतुं. तेने बदले प्राकृतव्याकरणनी मुद्रित वाचनाओमां आ उदाहरण- मूल पद्य 'रक्खउ वो रोमलया०' (गउडवहो-१८८) आखं जोवा मळे छे.

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