Book Title: Anusandhan 1998 00 SrNo 12
Author(s): Shilchandrasuri
Publisher: Kalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad

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Page 113
________________ कृति * उर्दुभाषा बद्ध त्रण कृतिओ * उवसग्गहर थुत्तनी समस्या पूर्ति * " उवहाण पइट्ठा पंचासग" उपरथी फलित थतो एक मुद्दो ए * १०१ बोलसंग्रह भूमिका * एक पत्र ओ * ओरिएन्टल कोन्फरन्स ३८मुं संमेलन क * कालजयी साहित्यकृतिना पुनरुद्धारकनुं अभिवादन * केटलाक मध्यकालीन गुजराती शब्दप्रयोगो ० 'अउगउ', 'उगउ' ● 'अउगनाइ' ● 'अउल्हाइ' Jain Education International 108 कर्ता संपादक मुनि भुवनचंद्र पं. शीलचन्द्र विजय गणि महोपाध्याय श्री यशोविजयजी गणि पं. शीलचन्द्रविजय गणि विजयशील चन्द्रसूरि मुनि भुवन चन्द्र विजय पंड्या विजयशील चन्द्रसूरि जयंत कोठारी For Private & Personal Use Only अनु सं. ७ । ८९-९६ ६ । ६२-६४ पत्र ५ । ५२-५३ ७ । २१-४२ १२ । १०२-१०५ ९ । ११४ ९ । ९७-९८ २ ।९-१३ २ । १० २ । ९-१० २ ।९ www.jainelibrary.org

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