Book Title: Aagam 01 ACHAR Moolam evam Vrutti
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Deepratnasagar
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आगम
(०१)
“आचार" - अंगसूत्र-१ (मूलं+नियुक्ति:+वृत्ति:) श्रुतस्कंध [२.], चुडा [२], सप्तैकक [६], उद्देशक [-], मूलं [१७२], नियुक्ति: [३२५] मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित......आगमसूत्र-[०१], अंग सूत्र-[१] “आचार" मूलं एवं शिलांकाचार्य-कृत् वृत्ति:
प्रत
श्रीआचा- राङ्गवृत्तिः (शी०) ॥४१५॥
श्रुतस्कं०२ चूलिका २ परक्रि०६
सूत्रांक [१७२]
दीप अनुक्रम [५०६]
दिषविधत्वेन क्षेत्रादिप्राधान्यतया पूर्ववत्स्वधिया योज्यानीति, सामान्येन तु जम्बूद्वीपक्षेत्रात्पुष्करादिकं क्षेत्रं परं, काल- परं तु प्रावृटुकालाच्छरत्कालः, भावपरमौदयिकादीपशमिकादिः॥ साम्प्रतं सूत्रानुगमे सूत्रमुच्चारणीयं, तवेदम्
परकिरियं अज्जालियं संसेसियं नो तं सायए नो वं नियमे, सिया से परो पाए आमजिज वा पमजिजा वा नो तं सायए नो सं नियमे । से सिया परो पायाई संवाहिज वा पलिमदिन वा नो तं सायए नो सं नियमे । से सिया परो पायाई कुसिज पा रखका वा नो तं सायए मो तं नियमे । से सिया परो पायाई तिल्लेण वा ध० बसाए वा मक्खिज वा अम्भिगिज वा नो २२ । से सिवा परो पाथाई लुद्धेण वा कोण वा चुन्नेण वा वणेण वा उल्लोडिज वा उव्यलिज वा नो तं २॥ से सिया परी पायाई सीओदगवियडेण वा २ उच्छोलिज का पहोलिज वा नो तं० । से सिया परो पायाई अन्नयरेण विलेवणजाएण आलिंपिज था विलिंपिज्ज चा भो तं० । से सिवा परो पायाई अन्नवरेण धूवणजाएण धूविज या पधू० नो तं २। से सिया परो पायाओ आणुयं वा कंटयं वा नीहरिज वा विसोहित्र वा नो तं०२ । से सिया परो पायाभो पूर्व वा सोणियं वा मीहरिज वा विसो० नो तं०२। से सिया परो कार्य आमज्जेज वा पमजिज वा नो तं सायए नो तं नियमे । से सिया परो कार्य लोट्टेण वा संवाहिज वा पलिमदिज वा नो तं० २ । से सिया परो कार्य तिलेण वा घ० बसा० मक्खिज बा अभंगिज वा नो तं० २।से सिया परो कार्य लुद्धेण वा ४ उल्लोडिज वा उल्बलिज वा नो तं० २ । से सिया परो कार्य सीओ. उसिणो० उच्छोलिन वा प० नो तं० २ । से सिया परो कार्य अन्नयरेण विलेवणजाएण आलिंपिज बा २ नो तं०२ से कार्य अन्नयरेण धूवणजाएग धूविज वा प० नो तं० २ । से० का
॥४१५॥
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