Book Title: Vishva Kartutva Mimansa Evam Jagat Kartutva Mimansa
Author(s): Sushilsuri, Jinottamvijay
Publisher: Sushil Sahitya Prakashan Samiti

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Page 38
________________ । प्र...श...स्ति [अनुष्टुप् छन्द:] नेत्राकाशशरव्योम युग्मवर्षे सुवैक्रमे। वर्षादौ कात्तिके मासे , ___ मङ्गले पूणिमा दिने ।। १ ।। विश्वप्रसिद्ध-तीर्थेऽस्मिन् , __ श्रीराणकपुरे वरे। शुभोपधान - वेलायां , मङ्गले मङ्गलप्रदे ।। २ ।। नेमि - लावण्य - दक्षाणां , गुरूणां कृपया मया । विश्वकर्तृत्वमीमांसा, - कृता सुशीलसूरिया ॥ ३ ॥ विश्वकत्त त्व-जिज्ञासा दत्तचित्तानुवत्तिनाम् । बोधनार्थं च मीमांसा , वीतराग - मतानुगा ।। ४ ।। आगमतत्त्व - संशुद्धया , बुद्धया वै कल्पिता कृतिः । यावत् सूर्य-शशाङ्कौ च , भातु तावदिय कृतिः ।। ५ ।।

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