Book Title: Vishva Kartutva Mimansa Evam Jagat Kartutva Mimansa
Author(s): Sushilsuri, Jinottamvijay
Publisher: Sushil Sahitya Prakashan Samiti

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Page 50
________________ । कार्य हैं, इसलिए ये भी बुद्धिमान् कर्त्ता के बनाये हुए होने चाहिए । व्यतिरेक रूप में प्रकाश इत्यादि कार्य नहीं है, इसलिए किसी बुद्धिमान् कर्त्ता के बनाये हुए भी नहीं हैं । जो कोई इन पदार्थों का बुद्धिमान् कर्त्ता है, वह भगवान ईश्वर ही है । " उक्त हेतु प्रसिद्ध नहीं है, क्योंकि अपने-अपने कारणों से उत्पन्न होने से और अवयवी होने से पृथ्वी पर्वत इत्यादि का कार्यत्व सभी वादियों ने स्वीकार किया है । । यह हेतु प्रनैकान्तिक ( व्यभिचारी) अथवा विरुद्ध भी नहीं है, क्योंकि इसकी विपक्ष से प्रत्यन्त व्यावृत्ति है । यहाँ यह ध्यातव्य है कि जिस हेतु की विपक्ष में भी अविरुद्ध वृत्ति हो, अर्थात् जो हेतु विपक्ष में भी चला जाये उसे नैकान्तिक हेत्वाभास कहते हैं । जैसे घड़ा ठण्डा है, क्योंकि मूर्तिक है । यहाँ मूर्त्तित्व की व्याप्ति ठण्डा मौर गर्म दोनों के साथ है, अर्थात् मूर्त्तित्व हेतु विपक्ष गर्म में भी चला जाता है, इसलिये दूषित है ? यहाँ कार्यत्व हेतु को विपक्ष अर्थात् प्रकाश इत्यादि से व्यावृत्ति है, इसलिए यह हेतु अनैकान्तिक नहीं है । इसलिए कार्यत्व हेतु विरुद्ध भी नहीं है । जिस हेतु का अविनाभाव सम्बन्ध साध्य से विरुद्ध के साथ निश्चित हो उसे हेत्वाभास कहते विश्वकर्तृत्व-मीमांसा - ३५

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