Book Title: Shastra Sandesh Mala Part 12
Author(s): Vinayrakshitvijay
Publisher: Shastra Sandesh Mala

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Page 337
________________ = = // 31 // अह आगयाए तीए दवाविओ सोहणो य आवासो / भोयणदाणप्पमुहा विहिया गुरुउचियपडिवत्ती // 27 // विण्णत्तो तीए निवो राहं जो विधिहि सुओ तुज्झ। सो च्चिय मं परिणेही इइ पइण्णा ममं अस्थि // 28 // रण्णा भणियं भो सुयणे ! इत्थत्थे कि किलिस्सहसि ? सुया / एक्किक्कपहाणगुणा सव्वे वि सुआ जओ मज्झं // 29 // उचियपएसे य तओ सव्वेयरभमिरचक्कपंतिल्लो.। सिररइयपुत्तिगो लहु महं पइट्ठाविओ थंभो // 30 // अक्खाडओ य रइओ बद्धा मंचा कयाइ उल्लोया / हरिसुल्लसंतगत्तो आसीणो तत्थ नरनाहो उवविट्ठो नयरिजणो आहूया रायेण निययपुत्ता। वरमालं घेत्तूणं समागया सा वि रायसुया // 32 // अह सव्वपुत्तजेट्ठो सिरिमाली राइणा इमं वुत्तो। हे वच्छ ! मणोवंछियमवज्झमेत्तो कुणसु मज्झ // 33 // धवलसु नियकुलपरम-मुइण्णं नेसु रज्जमणवज्जं / गेण्हाहि जयपडायं सत्तूण य विप्पियं कुणसु . // 34 // एवं रायसिरिं पि पच्चक्खं निव्वुइं नरिंदसुयं / परिणेसु कुसलाए राहावेहं लहुं काउं // 35 // एवं वुत्ते रण्णा संखोहं पाविओ य वुड्डसुओ। लज्जायमाणवयणो दीणमणो उट्ठिओ थद्धो // 36 // किं कत्तव्वयमूढो अपुरिसक्कारथामगुणहीणो। विहलाभिमाणहिट्ठो थरहरियतणु त्ति तह दिट्ठो . // 37 // पुणरवि भणिओ रण्णा संखोहं वज्जिऊण हे पुत्त ! / .. कुणसु समीहियमत्थं कित्तियमेत्तं इमं तुब्भ // 38 // 328

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