Book Title: Sanatkumar Charitra
Author(s): Vardhmansuri, Hiralal Hansraj
Publisher: Shravak Hiralal Hansraj

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Page 8
________________ सान्वय भाषान्तर सनत्कुमार । हन्तुः खरानुसारेण शरासारं ततः कृती । साक्षेपं दिवि चिक्षेप स शरण्यशिरोमणिः ॥ २३ ॥ चरित्रं अन्वयः---ततः कृती, शरण्य शिरोमणिः सः हेतुः स्वर अनुसारेण साक्षेपं दिवि शरासारं चिक्षेप. ॥ २३ ॥ अर्थः-पछी कृतज्ञ तथा शरण करवा लायकोनो सरदार एवो ते राजकुमार मारनारना अवाजने अनुसार आक्षेप सहित आकाशमा ॥८॥ चाणोनो वरसाद फेंकवा लाग्यो. ॥ २३ ॥ एको रिपुकृपाणेन प्रहतः प्रापतत्ततः। पुमान्कुमारनाराचताडितस्त्वपरः पुरः ॥ २४ ॥ अन्वयः-ततः रिपुकृपालेन महतः एकः पुमान् पुरः पापतत्, अपरः तु कुमार नाराच ताडित: ॥२४॥ अर्थ:-पछी शत्रुनी तलवारथी घायल थयेलो एक पुरुष (त्यां) आगळ पड्यो, अने वीजो पण ते राजकुमारना वाणवडे घायल थइने पड्यो . ॥ २४ ॥ अथ तो मूर्छितो वीक्ष्य विस्मिते भूपतेः सुते । उत्ततार तडित्तारा कापि तारावतो वधूः ॥ २५ ॥ अन्वयः--अथ तौ मूर्छितौ वीक्ष्य भूपतेः सुते विस्मिते तारा अध्वतः तदित् तारा का अपि वधूः उत्ततार. ॥ २५ ॥ अर्थः-पछी तेओ बन्नेने मूर्छित थयेला जोइने ते राजकुमार आश्चर्य पामते छते आकाशमांथी वीजळीसरखी तेजस्वी कोइक स्त्री 15 (त्या) उतरी आवी. ॥ २५ ॥ 5453 Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org

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