Book Title: Rajasthan ke Jain Shastra Bhandaronki Granth Soochi Part 4
Author(s): Kasturchand Kasliwal, Anupchand
Publisher: Prabandh Karini Committee Jaipur
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मंथ का नाम
क्रमांक नं. सू. के. ४७. ३२९५ वाग्भट्टालंकारटीका
५८. ५४४७ वीतरागस्तोत्र १६. ४२२५ शरदुत्सवदीपिका १०. ५८२६ शांतिनाथस्तोत्र
६१. ४१०७ शांतिनाथस्तोत्र १२. ५१६६ षणयति क्षेत्रपालपूजा
६.. ५४६ षष्ठयधिकशतकटीका ६४. १८२३ सप्तनयावबोध
६५. ५४६७ सरस्वतीस्तुति
६६. ४६४९ सिद्धचक्रपूजा
६७. २७३१ सिंहासनद्रा त्रिशिका
६५. २०१५ कल्याणक
६६. ३६३१ धर्मचन्द्र मन्थ
७०.
१००५ यत्याचार
७१.
१०३६ अजितनाथपुराण
७२, ६४५४ कल्याणकविधि
७३. ५४४ चूनडी
७४. २६८८ जिनपूजा पुरं दर विधानकथा
५४३६ जिन रात्रिविधानकथा
७५..
७६. २०६७
W २०६८
मिणाहचरिङ
मिणाहचरिय
७८.४६०२ त्रिंशत जिनच उबीसी
७६. ५४३१
दशलक्षणकथा
50.
२६८८ दुधारसविधानकथा
८१. ४६८६ नन्दीश्वर जयमाल
८२. २६८८ निर्झरपंचमी विधानकथा
८३. २१०६ पासचरिय
८४.
८५.
५४३६ रोहिणीविधान
२९४३ रोहिणी चरित
-५१
मंथकार
बादिराज
भ० पद्मनंदि
सिंहनंदि
शुभस्वामी
ਧੁਰਿਮ
विश्वसेन
राजोपाध्याय
सुनिने सिंह
आशाधर
प्रभाचंद्
क्षेमर मुनि
समन्तभद्र
धर्मचन्द्र
मा० त्रसुनंद
विजयसिंह
विनयचंद
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अमरकोति
नरसेन
लक्ष्मणदेव
दामोदर
महासिंह
गुणभद्र
विनयचंद
कनककति
त्रिनयनंद
तेजपाल
गुणभद्र
देवनंदि
भाषा प्रथभंडार रचना काल
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१७२६
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