________________ sensual desires, anger and malignant malice. He should bring about the closes association between the mind and the soul. He should not be glad at heart by heartog pleasant words or seeing unpleasant sight. He should treat praise and censure, gold and iron, pleasure and pain, summer and winter, good and evil, agreeable and disagreeable, life and death as equal." ...A lamp illumines the house enveloped in darkness. In an identical manner enlightenment serves to reveal the supreme self." -Dr. S.S. Upadhyaya 'A Philosophical study of the Naradiya Puran' Chapter VI P. 151-152 35. शिवपुराण 6.16.72 4.18.18; 4.41.7.14,16 36. शिवपुराक विधे.स१८ अ. 37. जितेन्द्रचन्द्र भारतीय “शिव पुराण में शैवदर्शन तत्त्व', पृ. 136 4. ध्यायतस्तत्र मां नित्वं योगाग्निदीप्यते भृशम् कैवल्यं परमं याति देवानामपि दुर्लभम् // -मत्स्य पुराण (2) पृ. 148. श्लो. 59 39. स्वानांग 268 40. अलोए पडिहया सिद्धा, लोयागे य पइट्टिया ।—उववाई सूत्र 2; -उत्तराध्ययन 36.57 1. “पूर्वप्रयोगादसंगत्वाद् बंधच्छेदात् तथा गतिपरिणामाच्च" . "आविद्धकुलालचक्रवद् व्यपगतलेपालाम्बुवद् एरण्डबीजवद् अग्निशिखावच्च' 'धर्मास्तिकावाभावात्' .. -तत्त्वार्थसूत्र 10.6-7-8 42. शिव पुराण 2.1.6.11-12 4.41.14 / / 43. सागरमल जैन “जैन, बौद्ध तथा गीता के आचारदर्शनों का तुलनात्मक अध्ययन', पृ 420 4. सत्व ज्ञानमनन्तं च परानन्द परम्महः . अप्रमेय-मनाधारमविकारमनाकृतिः / -शिव पुराण 2.1.6.11,12 आचायंग 5.1.6.175 7. आचार्य कुन्दकुन्द -नियमसार' 178-179 47. बत्व व एगो सिद्धो, तत्व अपंता भवक्खयविमुक्का अयोच्च समोगाढा, पुट्ठो व सव्वे य लोगते / -उववाई सूत्र 9 4. शिव पुराण 2.1.6.11-12 1. जितेन्द्रचन्द्र भारतीय "शिव पुराण में शैवदर्शन तत्व', पृ. 202 50. शिव पुराण 7.2.6.1,2,8,10,19 51. आचागंग 1.5.6.171 . 52. शिव पुराण 4.41.14 2.1.6.11-12. 53. 'शिव पुराण में शैवदर्शन तत्त्व', पृ. 202 54. (0 “वतो वाचा निवर्तन्ते मनसा चेन्द्रियैः सह ..... अप्राकृता परा चैषा विभूति पारमेश्वरी // 263 / पुराणों में जैन धर्म