Book Title: Kangda Jain Tirth
Author(s): Shantilal Jain
Publisher: Shwetambar Jain Kangda Tirth Yatra Sangh

View full book text
Previous | Next

Page 49
________________ ( २४ ) केस चला और उन्हें छः छः महीनों की कैद की सजा दी गई। मिस्त्री बोले कि जिस युवक ने इस मूर्ति पर वार किया था उन का सारा वंश नष्ट हो गया। प्राचीन कांगड़ा नगर के कुछ स्मारक दो जैन मूर्तियां :-पिछले लेख में बताया जा चुका है कि किला के सिवा कांगड़ा नगर में भी तीन जैन मन्दिर शोभायमान थे। परन्तु हमें अभी कत इन तीनों मन्दिरों के सम्बन्ध में कोई जानकारी प्राप्त नहीं हो सको । प्राचीन कांगड़ा नगर के बाज़ार में इन्द्र श्वर का एक हिन्दू मन्दिर है उसकी दीवारों पर दो जैन मूर्तियां विराजमान हैं जिनका उल्लेख आर्कीयोलोजिकल सर्वे आफ इण्डिया की सन् १९०५-१६०६ को एन्युल रिपोर्ट के १६ में पृष्ठ पर संक्षेप से इस प्रकार दिया है : "............(कांगड़ा शहर में इन्द्रेश्वर के मन्दिर) की दक्षिण ओर एक दूसरा कमरा है जो पूर्व का असली मन्दिर होना चाहिये । जनरल कनींघम के वर्णन मुताबिक इसके अन्दर जाते समय दोनों तरफ दो जिन मूर्तियां दिखाई पड़तो हैं । इस में एक ऊपर सप्तर्षि अथवा लौकिक संवत् ३०वें वर्ष का शिलालेख है । डाक्टर बुल्हर, जिन्होंने नोट :-तीर्थंकरों की मूर्तियों के चमत्कार कई बार सुनने में आते हैं, यह चमत्कार तीर्थंकरों की ओर से कभी नहीं होते क्योंकि तीर्थकर मोक्षगामी होते हैं और राग द्वेष से परे । यह चमत्कार अधिष्ठायक देवताओं द्वारा कभी कभी प्रकट में आते हैं। मूर्ति की आशातना होने पर यदि उनकी दृष्टि पड़ जाये तो रक्षा निमित्त वह चमत्कार दिखला जाते है। Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com

Loading...

Page Navigation
1 ... 47 48 49 50 51 52 53 54 55 56 57 58 59 60 61 62 63 64 65 66 67 68 69 70 71 72 73 74 75 76 77 78 79 80 81 82 83 84 85 86 87 88 89 90 91 92 93 94 95 96 97 98 99 100 101 102 103 104