Book Title: Kangda Jain Tirth
Author(s): Shantilal Jain
Publisher: Shwetambar Jain Kangda Tirth Yatra Sangh

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Page 95
________________ (६४) १. तेरा है नाम दुनियां में तारनतरन, काटो मेरे प्रभु जी भी जन्मोमरण देखा मुक्ति दे जा मैं नज़ारे प्रभु..... आया २. श्रआया तूफान पैंदे ने ओले प्रभु। नैय्या मेरो ए डगमग डोले प्रभु रुडदी जांदी पई बे सहारे प्रभु......पाया ३. नैय्या मेरी अटक कर भंवर में पड़ी सब को छोड़ प्रभु आस तेरी धरी और तेरे विना कौन तारे प्रभु..... अाया ४. तेरे दर्शन का अभिलापी आया हूँ मैं ध्यान तेरे ही चरणों में लाया है मैं ___मारांदेवी माँ के दुलारे प्रभु......ाया ५. मेरे देवाधिदेव दया कीजिये अपने चरणों में मुझको जगह दीजिये ___यही बी० एल है अर्ज गज़ारे प्रभु..... पाया (४) आये तेरे द्वार प्रभु जी आये हम आये तेरे द्वार प्रभु जी आये १. आदीश्वर भगवान हमारे, मोरांदेवी माता के दुलारे तुम हो तारणहार......... २. शुद्ध मन से जो तुम्हें ध्यावे, भवसागर से वह तर जावे। होवे बेड़ा पार.........प्रभु जी आये ३. दूर दूर से यात्री आवन, रल मिल गीत तेरे ही गावन बोलन जय जयकार........ प्रभु जी आये Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com

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