Book Title: Kangda Jain Tirth
Author(s): Shantilal Jain
Publisher: Shwetambar Jain Kangda Tirth Yatra Sangh

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Page 75
________________ ( ४४ ) चिन्तपुर्णी-यह मन्दिर भी बहुत प्रसिद्ध है। पंजाब के मुख्य २ नगरों से हजारों यात्री इस के दर्शनों को प्रति वर्प आते हैं। श्रावण मास में बड़ा भारी मेला लगता है । माता के मन्दिर पर सैंकड़ों ध्वजायें चढ़ाई जाती हैं यह मन्दिर कांगड़ा से होश्यारपुर को जाने वाले रास्ते पर आता है । कांगड़े से तीस मील की दूरी पर स्थित है। रमणीय स्थान-धर्मसाला, भागसूनाथ पालमपुर, बैजनाथपपरोला आदि कितने ही सौन्दर्य पूर्ण रमणीय स्थान इधर देखने योग्य हैं । सभी कांगड़े से बीस पञ्चोस मीलों की दूरी पर स्थित हैं । इनका जल और वायु बड़ा स्वच्छ और स्वास्थ्यप्रद है । प्रकृति की छटा देखने योग्य है । गरमी के मौसम में लोग मनोरञ्जन के लिये आते हैं। योगिन्द्र नगर-हिमाचल की बर्फानी घाटियों में शोभायमान यह सुन्दर स्थान बिजली-उत्पादन का विशाल घर है । यहाँ पर बड़े बड़े बंध बांध कर पहाड़ों में बहने वाली छोटी छोटी नदियों का जल इकट्ठा करके बिजली पैदा की गई है जो कि सारे पंजाब में दूर दूर तक अपने प्रकाश से अन्धकार को दूर कर रही है। इसके कल-कारखाने देखने योग्य हैं। Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com

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