Book Title: Kangda Jain Tirth
Author(s): Shantilal Jain
Publisher: Shwetambar Jain Kangda Tirth Yatra Sangh

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Page 81
________________ ( ५० ) भी उस वक्त बुला लेवें गुरु महाराज की मौजूदगी में वे कांगड़ा के सब हालात पेश करें और वे क्या करना चाहते हैं और वहाँ की कमेटी के कौन कौन मैम्बर हैं यह सब हालात खुलासावार जाहिर करें। फिर हम यहाँ बम्बई के चीदा चीदा भाईयों को बुला कर सब हालात समझायेंगे । फिर उमीद है कि यहाँ से कुछ न कुछ इमदाद मिल जायेगी । आपके कार्य में सफलता होगी। कांगड़ा तीर्थ मशहूर हो जायेगा। फिर यात्रियों की अामदोरफत बहुत ज्यादा हो जायेगी फिर आहिस्ता आहिस्ता सब कुछ बन जायेगा और यहाँ से कान्स भी कुछ प्रचार करेगी । यहाँ के लोगों को ख्याल तो है मगर एक दफा तुम लोग यहाँ बम्बई में आकर रूबरु में सब हालात जाहिर करो। इस लिये तुम को लिखा जाता है कि इस खत के पहुंचने पर फौरन ही तुम लोग जो कांगड़ा तीर्थ कमेटी के कार्यकर्ता-कारकुन ही वे बम्बई पहुँच जावें । भाई मोहनलाल चौकसी ने यह भी कहा था कि "मैंने उन भाईयों को कहा था कि तुम बम्बई में आओ। श्री आचार्य भगवान की मौजूदगी में सब बातें जाहिर करो फिर उम्मीद है कि काम बन जावेगा"। इस लिये दोबारा लिखा जाता है कि इस खत के पहुँचते ही तुम लोग जो भी काम करने वाले होश्यार और सब हालात को समझाने वाले हैं वे सब भाई चन्द योम तक ज़रूर बम्बई पहुँच जावें ताकीद दर ताकीद है । सब संघ को श्री आचार्य भगवान् आदि मुनिमण्डल की तरफ से धर्मलाभ कह देवें । मुनि विशुद्धविजय की तरफ से धर्मलाभ । जवाब जल्द । अज़ आचार्य भगवान् श्रीमद् विजयवल्लभ सूरि जी महाराज श्री महावीर जैन विद्यालय, ग्वाल्यिा टेंक रोड, बम्बई २६ । . Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com

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