Book Title: Ghantakarn Kalp
Author(s): Chandanmal Nagori
Publisher: Chandanmal Nagori Jain Pustakalay

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Page 7
________________ = समर्पण-पत्र स्वर्गवासी जैनाचार्य भट्टारक श्री जिनऋद्धि सूरीश्वरजी महाराज जैन जनता श्रीमोहनलालजी महाराज के नाम से विशेष परिचित है, चरित्र नायक भट्टारक जी महाराज उक्त मुनिराज के हस्तदीक्षित प्रशिष्य हैं, आपके उपदेश से समाज के हित के बहुत से कार्य हुए हैं उनमें से एक तो श्री मुनिसुव्रत स्वामी का नवपद मंडल सहित मंदिर और दूसरा बम्बई में पायधुनी पर श्रीमहावीर भगवान के मंदिर में श्रीघंटाकर्ण देव की मूर्ति की स्थापना । वैसे तो आपके कराये हुए कामों की नामावली विशेष है परन्तु हमें तो यहां श्रीघंटाकर्ण देव की स्थापना से सम्बन्ध है, आप पर घंटाकर्ण देव प्रसन्न थे एक दो बार तो प्रतिष्ठा के समय प्रत्यक्ष चमत्कार दिखाया था जिसका दृष्य उस समय की उपस्थित जनता ने देखा था, कठिन कार्य की सिद्धि के हेतु घंटाकर्ण देव को आप प्रथम आगेवान मानते थे और तत् Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com

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