Book Title: Ghantakarn Kalp
Author(s): Chandanmal Nagori
Publisher: Chandanmal Nagori Jain Pustakalay
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घंटाकर्ण स्तोत्र
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ऊँ घंटाकर्ण महावीर; सर्व व्याधि विनाशकः ॥ विस्फोटक भयं प्राप्ते, रक्ष रक्ष महावल ॥ १ ॥ ॐ यत्र त्वं तिष्टसे देव लिखितोऽन्नर पंक्रिभिः ॥
रोगास्तत्र प्रणश्यति वात पित्त कफोद्भवा ॥ २ ॥ तत्र राजभयं नास्ति, यांति करणे जपानयं ॥ शाकिनी भूत वैताला, राक्षसा प्रभवन्ति न ॥ ३ ॥ नाकाले मरणं तस्य न च सर्पेण दस्यते ॥ ७ अग्निचोरभयं नास्ति, ह्रीं घंटाकर्ण नमोस्तुतेो ।
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660000000,
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