Book Title: Ghantakarn Kalp
Author(s): Chandanmal Nagori
Publisher: Chandanmal Nagori Jain Pustakalay

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Page 24
________________ घंटाकरण- कल्प [ ७ ५. संतिकर मंत्र कल्प रोग पीड़ा निवारण में सहायता पहुंचाता है । ६. विजय पहुत मन्त्र कल्प, इसके यन्त्र भी हैं और यह जैन समाज में विशेष प्रसिद्ध है । ७. नमिउण मन्त्र कल्प, नवस्मरण में इसका उल्लेख है । ८. ऋषि मण्डल स्तोत्र - कल्प इसकी अपूर्वता का वर्णन तो विशेष है, अनुभव में आया है कि इसका मूल मन्त्र और साधन सिद्धि के लिए इसका विधान स्वीकार किया जाय अति नहीं अत्यन्त लाभदाई होगा यह पुस्तक भी मेरे सम्पादन में प्रकाशित हो चुकी है। ६. भैरव पद्मावती कल्प यह भी विशेष प्रभावशाली है और विधि-विधान से सिद्ध किया जाय तो लाभदाई है । इस तरह से और कल्प बहुत से हैं, औषधियों के भी मन्त्र व कल्प देखने में आये हैं, और मन्त्र महिमा में सूरि मन्त्र का आराधन आचार्य महाराज करते हैं और वर्द्धमान विधान के मूल मन्त्र की आराधना Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com

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