Book Title: Ghantakarn Kalp
Author(s): Chandanmal Nagori
Publisher: Chandanmal Nagori Jain Pustakalay

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Page 34
________________ - घंटाका कल्प - नहीं बताया अतः तिलक वैसे ही कर लेना। आसन विचार आसन नया काम में लेना, जो पग - लम्बा चौडा हो आसन ऊन का ही काम में लेना, चोकोर घाट का या जैसा भी हो सुख पूर्वक बैठ सकें और जीव जन्तु उस पर न पा सके इस तरह की व्यवस्था रखना । लक्ष्मी प्राप्ति के हेतु अाराधन करना हो नो सफेद प्रासन, कष्ट निवारण के लिए लाल श्रासन और वर कार्य के लिए श्याम आसन लेना बताया गया है । प्रासन शुद्धि की तरफ ध्यान रखना चाहिए। जो स्थान ध्यान करने के लिए तैयार किया हो उसमें जिस जगह ध्यान करने के लिए बैठें वहां पर आसन बिछाकर बैठे बाद भूमि को विशेष शुद्ध बनाने के लिए भूमि देव की पूजा के हेतु नीचे लिखा मंत्र इक्कीस बार पढ़ । ॥ ॐ ह्रीं श्रीं भूम्यादिदेवाय नमः ॥ मंत्रोच्चार करते समय धूप दीप तो पहले से ही रहता है और पूजा के हेतु भूमि पर जल पुष्प कंकुम नैवेद्य, और फल चढाकर शक्ति अनुसार भेट करे, इस तरह क्रिया पूरी हो जाने के बाद सामग्री को देखे । Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com

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